30 Jun 2026, Tue

क्या पर्दे के पीछे भारत-पाकिस्तान की बातचीत हो रही है? विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बता दी पूरी सच्चाई

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में कथित तौर पर हुई अनौपचारिक बातचीत को लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा है कि ऐसे कार्यक्रम निजी संस्थाओं की ओर से आयोजित किए जाते हैं और इनमें भारत सरकार की कोई आधिकारिक भागीदारी, समर्थन या भूमिका नहीं होती। उन्होंने साफ किया कि इन बैठकों में शामिल भारतीय प्रतिनिधि अपने व्यक्तिगत विचार रखते हैं और वे केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

दोनों देशों के बीच कथित ‘बैकडोर बातचीत’ की चर्चा उस समय शुरू हुई, जब कोलंबो में आयोजित एक क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के कुछ पूर्व अधिकारियों तथा विशेषज्ञों के बीच बातचीत होने की खबर सामने आई। रिपोर्टों में इसे ‘ट्रैक-2 डायलॉग’ बताया गया था। इसके बाद सवाल उठने लगे थे कि क्या लंबे समय से तनावपूर्ण चल रहे भारत-पाकिस्तान संबंधों में बातचीत की कोई नई पहल शुरू हुई है।

निजी कार्यक्रमों का सरकार से कोई संबंध नहीं

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दुनियाभर में अलग-अलग विषयों पर ऐसे कई कार्यक्रम होते रहते हैं। इनमें कुछ भी नया या विशेष नहीं है। उन्होंने कहा कि ये निजी पक्षों द्वारा आयोजित निजी कार्यक्रम हैं और भारत सरकार के लिए इनमें कुछ भी आधिकारिक नहीं है।

मिस्री के मुताबिक, इन कार्यक्रमों में शामिल होने वाले सेवानिवृत्त राजनयिक, पूर्व सैन्य अधिकारी, राजनीतिक हस्तियां या नागरिक समाज के सदस्य अपनी व्यक्तिगत क्षमता में हिस्सा लेते हैं। उनके विचारों को भारत सरकार की आधिकारिक नीति या रुख के तौर पर नहीं देखा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ऐसे कार्यक्रमों को कोई विशेष महत्व नहीं देती।

कोलंबो सम्मेलन में शामिल हुए थे पूर्व अधिकारी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कोलंबो में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज से जुड़े क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के कुछ पूर्व सैन्य अधिकारियों, राजनयिकों और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने अनौपचारिक चर्चा की थी।

कथित बातचीत में आतंकवाद, जल बंटवारा, तनाव के दौरान संचार व्यवस्था और सैन्य टकराव के खतरे को कम करने जैसे विषयों पर विचार रखे जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, भारत की ओर से कोई सेवारत सरकारी अधिकारी इस बातचीत में शामिल नहीं था। सरकार ने इसे आधिकारिक या ‘ट्रैक-1.5’ वार्ता मानने से भी इनकार किया है।

ट्रैक-2 डायलॉग आमतौर पर पूर्व अधिकारियों, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के सदस्यों के बीच होने वाली अनौपचारिक चर्चा को कहा जाता है। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के विचारों को समझना होता है, लेकिन इसमें लिए गए फैसले सरकारों पर बाध्यकारी नहीं होते।

पाकिस्तान के अफगानिस्तान पर हमलों की भारत ने की निंदा

इस बीच भारत ने अफगानिस्तान के इलाकों पर पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमलों की भी कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने इसे अफगानिस्तान की संप्रभुता पर हमला और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए सीधा खतरा बताया। भारत ने कहा कि पाकिस्तान की कार्रवाई उसके लापरवाह व्यवहार को दर्शाती है और नागरिकों को निशाना बनाने को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अफगान अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के हवाई और जमीनी अभियानों में कम से कम 36 नागरिक मारे गए और 160 से अधिक घायल हुए। वहीं संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन ने शुरुआती तौर पर कम से कम 28 नागरिकों की मौत और 49 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। पाकिस्तान का दावा है कि उसकी कार्रवाई आतंकवादी संगठनों के ठिकानों के खिलाफ थी।

फिलहाल भारत सरकार की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोलंबो में हुई अनौपचारिक बातचीत को भारत-पाकिस्तान के बीच आधिकारिक कूटनीतिक संवाद या रिश्तों में बदलाव के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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