लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। राज्यभर में कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शहर के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र काकादेव में बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील कर दिया है। इसके अलावा 22 अन्य संस्थानों को भी चिन्हित किया गया है, जिनके खिलाफ जल्द कार्रवाई की जा सकती है।
केडीए की इस कार्रवाई से काकादेव क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुबह से शुरू हुए अभियान के दौरान अधिकारियों की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और चिन्हित भवनों पर सीलिंग की कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि जिन भवनों पर कार्रवाई की गई, उनमें से कई बिना आवश्यक अनुमति और निर्धारित सुरक्षा मानकों के संचालित किए जा रहे थे।
लखनऊ हादसे के बाद प्रशासन हुआ सख्त
हाल ही में लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक कोचिंग भवन में भीषण आग लगने से कई छात्रों की मौत हो गई थी। इस दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। हादसे के बाद राज्य सरकार ने सभी जिलों में कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे।
इसी निर्देश के तहत कानपुर विकास प्राधिकरण की टीम ने काकादेव क्षेत्र का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई इमारतों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, अवैध निर्माण और अग्निशमन व्यवस्था में गंभीर खामियां पाई गईं। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित संस्थानों को सील कर दिया।
सुरक्षा मानकों की मिली अनदेखी
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई कोचिंग संस्थान ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां अग्निशमन उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कई भवनों में आपातकालीन निकास मार्ग तक उपलब्ध नहीं थे।
इसके अलावा कई इमारतों में नक्शा स्वीकृति, पार्किंग व्यवस्था और अन्य आवश्यक मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा था। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
कार्रवाई के दौरान कई कोचिंग संस्थानों में नियमित कक्षाएं चल रही थीं। अचानक हुई सीलिंग की कार्रवाई के चलते छात्रों और अभिभावकों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
कई छात्र अपनी पढ़ाई और आगामी परीक्षाओं को लेकर चिंतित नजर आए। हालांकि प्रशासन का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भवन में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, तो वहां किसी भी समय गंभीर दुर्घटना हो सकती है। इसलिए नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
एक ही रास्ते से प्रवेश और निकास बना चिंता का विषय
स्थानीय लोगों का कहना है कि काकादेव क्षेत्र में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता उपलब्ध है।
अधिकांश भवनों में आपातकालीन निकास मार्ग नहीं होने के कारण आग या अन्य आपदा की स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद कठिन हो सकता है।
निवासियों ने प्रशासन से पूरे क्षेत्र का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
केडीए अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। शहर के सभी कोचिंग संस्थानों, शैक्षणिक परिसरों और व्यावसायिक भवनों की जांच की जाएगी।
जिन संस्थानों में अग्निशमन व्यवस्था, नक्शा स्वीकृति, पार्किंग और अन्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर में शुरू हुई यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि अब सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों और भवन संचालकों के खिलाफ प्रशासन कड़ा रुख अपनाने जा रहा है।

