14 Jun 2026, Sun

क्या शत्रुघ्न सिन्हा भी छोड़ेंगे TMC का साथ? सांसद ने दे दिया जवाब, बोले- ‘अभिषेक बनर्जी मेरे नेता नहीं हैं’

 

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि उनके नेता केवल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं और अभिषेक बनर्जी उनके नेता नहीं हैं।

“ममता बनर्जी ही मेरी नेता हैं” – शत्रुघ्न सिन्हा

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा,
“मैं ममता दीदी के साथ था, उनके साथ हूं और हमेशा उनके साथ रहूंगा। न तो अभिषेक बनर्जी और न ही कोई और मेरा नेता है। मेरी नेता सिर्फ ममता बनर्जी हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि यह समय पार्टी में एकजुटता दिखाने का है, न कि किसी तरह की दूरी बनाने का। उनके अनुसार ममता बनर्जी एक अनुभवी और परिपक्व नेता हैं, जिनके नेतृत्व में पार्टी आगे बढ़ रही है।

“मैं अकेला भी रहूं तो ममता के साथ रहूंगा”

TMC सांसद ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वे करीब 30 साल भारतीय जनता पार्टी (BJP) में रहे हैं और वहां से उन्होंने बहुत कुछ सीखा है।

उन्होंने कहा,
“अगर मेरे बारे में किसी ने कुछ कहा भी होगा तो वह अच्छे इरादे से ही कहा होगा। लेकिन मेरे लिए ममता बनर्जी के साथ रहना ही सबसे सही है। अगर मैं अकेला भी रहूं तो भी ‘एकला चलो’ के सिद्धांत पर चलते हुए उनके साथ ही रहूंगा।”

पार्टी के भीतर बढ़ती हलचल

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, TMC के अंदर इन दिनों नेतृत्व और आंतरिक संतुलन को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। कुछ नेताओं की नाराजगी कथित तौर पर अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर बताई जा रही है।

इसी बीच विधायक और सांसद स्तर पर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं। हाल ही में पार्टी नेता कल्याण बनर्जी ने भी बयान दिया था कि ममता बनर्जी को तय करना होगा कि वे पार्टी में किसे प्राथमिकता देती हैं।

कल्याण बनर्जी का बयान भी चर्चा में

कल्याण बनर्जी ने एक मामले में अपनी भूमिका को लेकर असंतोष जताते हुए कहा था कि उन्हें अचानक केस से हटाए जाने पर नाराजगी है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए और स्पष्ट संकेत दिए कि संगठन के भीतर फैसलों पर पुनर्विचार की जरूरत है।

निष्कर्ष

TMC के भीतर जारी इस बयानबाजी ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। शत्रुघ्न सिन्हा के बयान ने यह साफ कर दिया है कि वे ममता बनर्जी के प्रति पूरी तरह वफादार हैं, जबकि पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर असहमति की चर्चा लगातार बनी हुई है।

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