नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की रूस से तेल खरीद नीति का जोरदार बचाव करते हुए आलोचना करने वालों को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का यह फैसला पूरी तरह आर्थिक और ऊर्जा स्थिरता से जुड़ा है, न कि किसी राजनीतिक झुकाव से।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर भारत घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने और वैश्विक ऊर्जा स्थिरता बनाए रखने में मदद कर रहा है।
“भारत पर नैतिकता का उपदेश देना गलत” – जयशंकर
फिनलैंड में कुलतारंता वार्ता के दौरान “उभरती शक्तियां और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा” विषय पर बोलते हुए विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों की आलोचनाओं पर कड़ा जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि कुछ देश भारत को रूस से तेल खरीदने पर नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं, जबकि वही देश वर्षों से ऐसे हथियार बेचते रहे हैं जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ होता रहा है।
जयशंकर ने कहा, “किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है, लेकिन भारत पर उनके हथियारों का इस्तेमाल होता रहा है।”
अमेरिका का भी मिला समर्थन
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने खुद भारत को रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया था, ताकि वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनी रहे।
उन्होंने कहा कि उस समय अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता थी और भारत की भूमिका इसे संतुलित करने में महत्वपूर्ण रही।
“भारत लागत और उपलब्धता के आधार पर खरीदता है तेल”
जयशंकर ने साफ किया कि भारत किसी राजनीतिक दबाव में आकर नहीं, बल्कि पूरी तरह आर्थिक जरूरतों और बाजार की स्थिति के आधार पर तेल खरीदता है।
उन्होंने कहा कि रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इससे देश में महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर
विदेश मंत्री के अनुसार, रूस से तेल खरीद जारी रखने से वैश्विक सप्लाई बाधित नहीं होती और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर रहती हैं। यही कारण है कि भारत ने ऊर्जा नीति में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है।
निष्कर्ष
एस. जयशंकर के इस बयान ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी विदेश नीति और ऊर्जा रणनीति में “राष्ट्रीय हित पहले” की नीति पर काम करता है। रूस से तेल खरीद को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारत ने अपना रुख साफ करते हुए इसे आर्थिक आवश्यकता और वैश्विक स्थिरता से जुड़ा कदम बताया है।

