28 May 2026, Thu

महंगे ATF की वजह से धंधा चौपट, 1 जून से फ्लाइट्स की संख्या में 15% तक की कटौती करेंगे इंडिगो और एयर इंडिया

नई दिल्ली: देश की प्रमुख एयरलाइन कंपनियां IndiGo और Air India बढ़ती परिचालन लागत और कमजोर होती मांग के बीच घरेलू उड़ानों की संख्या में कटौती करने की तैयारी कर रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों एयरलाइंस 1 जून से अगले 90 दिनों तक अपनी घरेलू सेवाओं में कमी करेंगी। इस फैसले का मुख्य कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और गर्मियों के बाद यात्रा मांग में आई नरमी को बताया जा रहा है।

भारतीय विमानन उद्योग पिछले कुछ महीनों से कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। फरवरी के अंत में मध्य-पूर्व में शुरू हुए संघर्ष के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ा, जिससे कच्चे तेल और विमान ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका सीधा असर एयरलाइन कंपनियों की लागत पर पड़ा है, क्योंकि एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च का बड़ा हिस्सा ईंधन पर निर्भर करता है।

इंडिगो और एयर इंडिया की रणनीति

रिपोर्ट के मुताबिक, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो अपनी घरेलू उड़ानों में लगभग 5 से 7 प्रतिशत तक कटौती कर सकती है। वहीं एयर इंडिया करीब 15 प्रतिशत तक उड़ानें कम करने की योजना पर काम कर रही है। दोनों कंपनियों की भारतीय घरेलू विमानन बाजार में संयुक्त हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है, इसलिए इस कदम का असर लाखों यात्रियों पर पड़ सकता है।

एयरलाइन कंपनियों का कहना है कि यह अस्थायी कदम है और किसी भी रूट को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा। हालांकि, कई व्यस्त मार्गों पर उड़ानों की संख्या कम की जा सकती है ताकि लागत को नियंत्रित किया जा सके और उपलब्ध सीटों का बेहतर उपयोग हो सके।

ATF की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

विमानन उद्योग के जानकारों के अनुसार, एटीएफ की कीमतों में हाल के महीनों में भारी उछाल आया है। एयर इंडिया से जुड़े सूत्रों का कहना है कि घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ की लागत पहले लगभग 80,000 रुपये प्रति किलोलीटर थी, जो अब बढ़कर 1 लाख रुपये प्रति किलोलीटर से अधिक हो गई है। विभिन्न राज्यों में वैट (VAT) की दरें अलग-अलग होने के कारण ईंधन की कीमतें भी शहरों के अनुसार बदलती रहती हैं।

एयरलाइन अधिकारियों का मानना है कि इतनी ऊंची ईंधन लागत के बीच सभी उड़ानों को पहले की तरह संचालित करना आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रह गया है। ऐसे में कंपनियां उन रूटों पर उड़ानों की संख्या कम करेंगी जहां मांग अपेक्षाकृत कम है।

किन शहरों पर पड़ सकता है असर?

जानकारी के अनुसार, मुंबई से अहमदाबाद, नागपुर, पटना और भोपाल के लिए संचालित कुछ उड़ानों की संख्या घटाई जा सकती है। इसी तरह दिल्ली से हैदराबाद, बेंगलुरु और कोलकाता जाने वाली सेवाओं में भी कटौती की संभावना जताई जा रही है। एयरलाइंस का मानना है कि स्कूलों की छुट्टियां समाप्त होने के बाद घरेलू यात्रा मांग में सामान्य रूप से कमी आती है, इसलिए इस अवधि में उड़ानों का पुनर्गठन किया जा सकता है।

यात्रियों पर क्या होगा प्रभाव?

विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों की संख्या कम होने से कुछ मार्गों पर टिकटों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि एयरलाइंस का दावा है कि वे यात्रियों को न्यूनतम असुविधा पहुंचाने की कोशिश करेंगी।

विमानन क्षेत्र फिलहाल बढ़ती ईंधन लागत, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बदलती यात्रा मांग जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में एयरलाइन कंपनियों की रणनीति और बाजार की स्थिति पर यात्रियों और उद्योग जगत दोनों की नजर बनी रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *