भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर अपनी खूबसूरती, रंग-बिरंगे पंखों और आकर्षक नृत्य के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। बारिश के मौसम में जब मोर अपने पंख फैलाकर नाचता है तो यह दृश्य लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है। सोशल मीडिया पर भी मोर से जुड़े वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह खूबसूरत पक्षी कितने साल तक जीवित रहता है? आज हम आपको मोर के जीवनकाल और उससे जुड़ी कुछ बेहद दिलचस्प जानकारियां बताने जा रहे हैं।
मोर केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में अपनी सुंदरता के कारण पसंद किया जाता है। हालांकि, बदलते पर्यावरण और जंगलों की कटाई के कारण कई पक्षियों की तरह मोर की संख्या भी कुछ क्षेत्रों में प्रभावित हुई है। फिर भी भारत में यह पक्षी लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
मोर सर्वाहारी पक्षी होता है, यानी यह शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार का भोजन खाता है। आमतौर पर मोर खुले मैदानों, खेतों और जंगलों में अपना भोजन तलाशता है। इसे घास, बीज, फल, फूलों की कलियां और छोटे कीड़े-मकोड़े खाना पसंद होता है। इसके अलावा मोर छोटे सांप, चींटियां, दीमक, टिड्डे, भृंग और केंचुए भी खाता है। ग्रामीण इलाकों में मोर अक्सर खेतों में मूंगफली, धान, टमाटर, मिर्च और केले जैसी फसलों को खाते हुए दिखाई देते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया में मुख्य रूप से तीन प्रकार के मोर पाए जाते हैं— भारतीय नीला मोर, हरा मोर और सफेद मोर। इन तीनों प्रजातियों की उम्र अलग-अलग होती है। birdsjungle की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नीला मोर सामान्य परिस्थितियों में लगभग 10 से 15 वर्ष तक जीवित रहता है। वहीं हरा मोर 12 से 16 वर्ष तक और सफेद मोर लगभग 10 से 15 वर्ष तक जीवित रह सकता है।
अगर मोर को सुरक्षित वातावरण और उचित देखभाल मिले तो इसकी उम्र और भी बढ़ सकती है। कैद या संरक्षण केंद्रों में रहने वाले मोर सामान्य से अधिक समय तक जीवित रहते हैं। ऐसे में भारतीय नीला मोर 18 से 20 वर्ष, हरा मोर 18 से 22 वर्ष और सफेद मोर करीब 18 से 20 वर्ष तक जीवित रह सकते हैं।
कई लोग मोर को पालतू पक्षी की तरह पालते हैं और उसकी विशेष देखभाल करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मोर को संतुलित आहार, साफ वातावरण और नियमित स्वास्थ्य जांच मिले तो उसकी उम्र बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए विटामिन और खनिज युक्त भोजन देना जरूरी होता है। साथ ही उसके रहने के स्थान को मौसम और अन्य खतरों से सुरक्षित रखना भी बेहद आवश्यक है।
पशु चिकित्सकों के अनुसार, नियमित स्वास्थ्य जांच और परजीवियों का समय-समय पर इलाज भी मोर के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इसके अलावा उन्हें खुला वातावरण और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि मिलनी चाहिए, जिससे वे स्वस्थ और सक्रिय बने रहें।
मोर केवल भारत की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की सुंदरता का भी अनमोल हिस्सा है। यही कारण है कि लोग इस पक्षी से जुड़ी हर जानकारी जानने में काफी रुचि रखते हैं।

