तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा सियासी संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। Joseph Vijay के नेतृत्व वाली TVK सरकार बने अभी 10 दिन भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन सरकार को समर्थन दे रही Communist Party of India (Marxist) ने अब समर्थन वापस लेने की चेतावनी दे दी है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
CPI(M) ने रखी साफ शर्त
CPI(M) के तमिलनाडु राज्य सचिव पी षणमुगम ने स्पष्ट कहा है कि यदि TVK सरकार AIADMK के किसी गुट या उसके विधायकों के साथ मिलकर सरकार चलाने की कोशिश करती है, तो उनकी पार्टी अपने समर्थन पर दोबारा विचार करेगी।
उन्होंने कहा कि वामपंथी दलों ने TVK को समर्थन केवल इसलिए दिया था ताकि तमिलनाडु को दोबारा चुनाव का सामना न करना पड़े और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने जैसी स्थिति पैदा न हो।
जनता के जनादेश का हवाला
पी षणमुगम ने कहा कि जनता ने इस चुनाव में DMK और AIADMK दोनों को नकार दिया था। TVK 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे पूर्ण बहुमत नहीं मिला।
इसी कारण CPI(M), VCK और अन्य सहयोगी दलों ने बाहर से समर्थन देकर सरकार बनाने में मदद की थी। उनका कहना है कि अगर अब TVK, AIADMK के बागी विधायकों को सरकार में शामिल करती है, तो यह जनता के जनादेश के खिलाफ माना जाएगा।
AIADMK के बागी विधायकों पर चर्चा
सूत्रों के अनुसार, AIADMK के 25 बागी विधायक सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री विजय सरकार को अधिक स्थिर और मजबूत बनाने के लिए इन विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।
इसी संभावना को लेकर CPI(M) ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।
सरकार के सामने क्या है गणित?
TVK सरकार को फिलहाल कांग्रेस, वामपंथी दलों, VCK और IUML का समर्थन प्राप्त है। यदि CPI(M) और अन्य छोटे सहयोगी दल समर्थन वापस लेते हैं, तो सरकार की स्थिति कमजोर हो सकती है।
हालांकि, AIADMK के बागी 25 विधायकों और AMMK के एक विधायक का समर्थन मिलने पर सरकार बहुमत साबित कर सकती है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे जनता के बीच नकारात्मक संदेश जा सकता है, क्योंकि चुनाव में लोगों ने पारंपरिक दलों के खिलाफ वोट दिया था।
विजय के लिए बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान साफ-सुथरी और नई राजनीति का वादा किया था। ऐसे में AIADMK के बागी नेताओं को शामिल करने का फैसला उनकी छवि पर असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि TVK की कोर टीम फिलहाल राजनीतिक संतुलन बनाए रखने और सहयोगी दलों को नाराज होने से रोकने के लिए लगातार बैठकें कर रही है।
तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी हलचल
राज्य में तेजी से बदलते राजनीतिक समीकरणों ने तमिलनाडु की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विजय सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने सहयोगियों को साथ बनाए रखने और सरकार को स्थिर रखने की होगी।
निष्कर्ष
तमिलनाडु में TVK सरकार बनने के कुछ ही दिनों बाद राजनीतिक संकट के संकेत मिलने लगे हैं। CPI(M) की चेतावनी ने मुख्यमंत्री विजय की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि TVK सरकार अपने सहयोगियों और संभावित नए समर्थन के बीच संतुलन कैसे बनाती है।

