18 May 2026, Mon

नागपुर के फ्लैट में छापे जा रहे थे जाली नोट, 4 साल से चल रहा था ये खेल; VIDEO में देखें

महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले में नकली नोटों के एक बड़े रैकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एक एटीएम में 100 रुपये के नकली नोट जमा करने की मामूली कोशिश ने करोड़ों रुपये के अंतर-जिला जाली नोट गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि नागपुर के एक किराए के फ्लैट में फिल्मी अंदाज में नकली नोट छापने का पूरा सेटअप तैयार किया गया था। इस मामले में पुलिस ने गढ़चिरोली के रहने वाले दो इंजीनियर सगे भाइयों समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक, यह अवैध कारोबार पिछले चार वर्षों से संचालित किया जा रहा था। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि इस गिरोह ने अब तक करोड़ों रुपये की जाली करेंसी बाजार में खपा दी होगी। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि गढ़चिरोली और आसपास के जिलों में कितनी नकली करेंसी चलन में आई और इस रैकेट से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।

पूरा मामला 11 मई को सामने आया, जब गढ़चिरोली शहर के कारगिल चौक स्थित Bank of Maharashtra के एटीएम में 100 रुपये के 21 नोट जमा करने की कोशिश की गई। एटीएम मशीन ने नोटों को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद बैंक अधिकारियों ने नोटों की जांच की। जांच में सभी नोट नकली पाए गए। इसके बाद बैंक मैनेजर प्रतीक अनासाने की शिकायत पर गढ़चिरोली पुलिस की स्थानीय अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पुलिस की जांच सबसे पहले प्रमोद टिकाराम कोवे नाम के युवक तक पहुंची, जो चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी तहसील के हलदा गांव का निवासी है। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि उसे ये नकली नोट गढ़चिरोली के एक पान ठेला संचालक आदित्य रेचनकर से मिले थे। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और टीम नागपुर पहुंच गई।

नागपुर के माधुरी अपार्टमेंट स्थित एक किराए के फ्लैट पर छापेमारी के दौरान पुलिस हैरान रह गई। वहां एक हाईटेक नकली नोट छापने का कारखाना चल रहा था। पुलिस ने मौके से 50, 100 और 200 रुपये के बड़ी मात्रा में नकली नोट बरामद किए। इसके अलावा हाई क्वालिटी कलर प्रिंटर, बॉन्ड पेपर, पेपर कटर और नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली कई आधुनिक मशीनें और सामग्री भी जब्त की गईं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी बेहद शातिर तरीके से काम कर रहे थे। वे छोटे मूल्य के नोट छापकर उन्हें स्थानीय बाजारों और एटीएम के जरिए चलन में लाने की कोशिश करते थे ताकि किसी को जल्दी शक न हो। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सदस्य तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग थे और नोटों की क्वालिटी इतनी बेहतर थी कि पहली नजर में उन्हें पहचानना मुश्किल था।

पुलिस ने इस मामले में दो इंजीनियर भाइयों सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित सप्लाई चैन का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ स्थानीय स्तर का मामला नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

गढ़चिरोली पुलिस अब बैंकिंग संस्थानों और बाजारों में चलन में मौजूद नकली नोटों की पहचान करने के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। वहीं, आम लोगों से भी सतर्क रहने और संदिग्ध नोट मिलने पर तुरंत पुलिस या बैंक को सूचना देने की अपील की गई है।

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