पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता Jahangir Khan ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुरक्षा की मांग करते हुए याचिका दायर की है। जहांगीर खान ने अदालत में दावा किया है कि उनके खिलाफ कई झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई हैं और उन्हें राजनीतिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गर्म कर दिया है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल पहले से ही बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, जहांगीर खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने कलकत्ता हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य के समक्ष मामले का उल्लेख किया और तत्काल सुनवाई की मांग की। याचिका में कहा गया है कि खान को जान-माल का खतरा है और उनके खिलाफ दर्ज मामलों का इस्तेमाल उन्हें राजनीतिक रूप से दबाव में लाने के लिए किया जा रहा है। अदालत से उन्होंने व्यक्तिगत सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जहांगीर खान पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी उम्मीदवार हैं। यह वही सीट है जहां चुनाव आयोग के निर्देश पर 21 मई को दोबारा मतदान होना है। इस सीट पर राजनीतिक तनाव काफी बढ़ा हुआ है और दोनों प्रमुख दलों—भाजपा और टीएमसी—के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। चुनावी माहौल के बीच जहांगीर खान का अदालत पहुंचना इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना रहा है।
जहांगीर खान पहले भी अपने विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में रह चुके हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने फिल्म ‘पुष्पा’ के मशहूर डायलॉग “पुष्पा झुकेगा नहीं” का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक संदेश दिया था। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था और विपक्षी दलों ने इसे लेकर तीखी आलोचना भी की थी। उस समय पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को पर्यवेक्षक बनाए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव और अधिक बढ़ गया था।
हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने भी जहांगीर खान को लेकर बयान दिया था। शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि “पुष्पा अब मेरी जिम्मेदारी है,” जिसे राजनीतिक चेतावनी के रूप में देखा गया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि राज्य में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है।
राज्य की राजनीति में बदलाव के बाद टीएमसी नेताओं की चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला था, जबकि टीएमसी को विपक्ष में बैठना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद कई पुराने मामलों की जांच तेज हो सकती है, जिसके चलते टीएमसी नेताओं में बेचैनी दिखाई दे रही है।
जहांगीर खान की याचिका पर अब कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है। इस मामले पर अदालत का फैसला राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। वहीं, भाजपा और टीएमसी दोनों ही इस मुद्दे को लेकर अपने-अपने तरीके से राजनीतिक संदेश देने में जुट गए हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

