पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान, अमेरिका तथा इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर अब भारत पर भी दिखाई देने लगा है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह (IGoM) की पांचवीं अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश की ऊर्जा आपूर्ति, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और संभावित वैश्विक संकटों के प्रभाव की समीक्षा की गई। बैठक में कई केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
सरकार की ओर से बताया गया कि पश्चिम एशिया में हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में भारत के लिए कच्चे तेल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। बैठक में इस बात का आकलन किया गया कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो उसका भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर क्या असर पड़ सकता है। साथ ही इस स्थिति से निपटने के लिए कई रणनीतिक कदमों पर भी चर्चा हुई।
बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सभी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार हर परिस्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
राजनाथ सिंह ने देशवासियों से खास अपील भी की। उन्होंने कहा कि लोगों को किसी भी तरह की घबराहट में आने की जरूरत नहीं है। सरकार ऊर्जा और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने नागरिकों से संयम बनाए रखने और सरकार के प्रयासों पर भरोसा रखने की अपील की।
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुश्किल वैश्विक दौर में देशवासियों से सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है। सरकार चाहती है कि लोग ईंधन और संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करें ताकि संकट की स्थिति में देश मजबूत बना रहे।
सूत्रों के मुताबिक बैठक में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता, खाद्य सामग्री के भंडारण, आयात-निर्यात की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने संबंधित मंत्रालयों को लगातार निगरानी बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है, इसलिए वहां की स्थिति भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश में जरूरी वस्तुओं की कोई कमी नहीं है और सभी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं।
सरकार की इस सक्रियता को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आम जनता को राहत देने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए और भी बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

