6 May 2026, Wed

कौन थे आर बी चौधरी? विजय को ‘मास सुपरस्टार’ बनाने में थी अहम भूमिका, निधन से इंडस्ट्री में पसरा मातम

दिग्गज निर्माता आरबी चौधरी का निधन, तमिल सिनेमा में शोक की लहर

तमिल फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज निर्माता आरबी चौधरी के निधन से पूरे फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। 5 मई को राजस्थान के जोधपुर में एक दुखद कार दुर्घटना में उनका आकस्मिक निधन हो गया। यह खबर सामने आते ही दक्षिण भारतीय सिनेमा सहित पूरे देश में उनके चाहने वालों और फिल्मी हस्तियों के बीच गहरा दुख फैल गया। उनका पार्थिव शरीर चेन्नई लाया जा रहा है, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचने की उम्मीद है।

आरबी चौधरी सिर्फ एक सफल निर्माता ही नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में भरोसे और गुणवत्ता का पर्याय बन चुके थे। Super Good Films के संस्थापक के रूप में उन्होंने चार दशकों तक सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं। उनका सफर बेहद प्रेरणादायक रहा—राजस्थान में रतनलाल भगचंद चौधरी के रूप में जन्मे आरबी चौधरी ने शुरुआत में ज्वेलरी, लोहे और निर्यात जैसे व्यवसायों में सफलता हासिल की, लेकिन बाद में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की ओर रुख किया और यहां भी अपनी अलग पहचान बनाई।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1988 में मलयालम फिल्म आदि पापम से की थी। शुरुआती दौर में लयनम और कल्पना हाउस जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने धीरे-धीरे इंडस्ट्री में जगह बनाई। लेकिन असली पहचान उन्हें Pudhu Vasantham से मिली, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी और उन्हें तमिल सिनेमा के शीर्ष निर्माताओं में शामिल कर दिया।

अपने बैनर के तहत उन्होंने कई सुपरहिट और लोकप्रिय फिल्मों का निर्माण किया, जिनमें चेरन पांडियन, Nattamai, पूवे उनाक्कागा, Love Today, सूर्यवंशम, थुल्लाधा मनमम थुल्लम, आनंदम, नी वरुवाई एना और Thirupaachi जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की, बल्कि दर्शकों के दिलों में भी खास जगह बनाई।

दक्षिण भारतीय सुपरस्टार Vijay के करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी आरबी चौधरी की अहम भूमिका रही। पूवे उनाक्कागा जैसी फिल्मों ने विजय को एक उभरते सितारे से लोकप्रिय हीरो बनाया, जबकि तिरुपाची ने उनकी ‘मास हीरो’ की छवि को मजबूत किया। इसी तरह R. Sarathkumar को नट्टामई के जरिए एक मजबूत जननायक की पहचान मिली।

अपने करियर के अंतिम वर्षों में भी आरबी चौधरी सक्रिय रहे और अपनी 100वीं फिल्म की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, उनके अचानक निधन से यह सपना अधूरा रह गया। हाल ही में उनके प्रोडक्शन हाउस ने मारीसन और मगुडम जैसी फिल्मों को समर्थन दिया था, जो उनके निरंतर योगदान को दर्शाता है।

उनके परिवार में उनके बेटे Jiiva और Jithan Ramesh शामिल हैं, जिन्होंने तमिल सिनेमा में अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

आरबी चौधरी का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका योगदान, उनकी दृष्टि और उनकी बनाई फिल्में आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।

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