25 Apr 2026, Sat

लखबीर सिंह हत्याकांड: सबूतों के अभाव में चार निहंग आरोपी बरी, कोर्ट का बड़ा फैसला

सोनीपत: साल 2021 में किसान आंदोलन के दौरान हुए चर्चित लखबीर सिंह हत्याकांड मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चार निहंग आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया, जिसके आधार पर दोष साबित किया जा सके।

यह मामला 15 अक्टूबर 2021 का है, जब पंजाब के तरनतारन निवासी 35 वर्षीय लखबीर सिंह का शव हरियाणा-दिल्ली सीमा स्थित सिंघु बॉर्डर पर पुलिस बैरिकेड से उल्टा लटका हुआ मिला था। शव की हालत बेहद भयावह थी—उनका एक हाथ कटा हुआ था और शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष चंद्र सरोए की अदालत में चल रही थी। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने निहंग सरबजीत सिंह, भगवंत सिंह, गोविंद प्रीत सिंह और नारायण सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत का कहना था कि पेश किए गए साक्ष्य आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।

हालांकि, इस मामले में एक अन्य आरोपी निहंग जत्थेदार अमन सिंह अभी भी फरार है और उसे भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। उसके खिलाफ मामला अभी विचाराधीन है और जांच जारी है।

गौरतलब है कि घटना के बाद कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें निहंगों का एक समूह घायल लखबीर सिंह के आसपास खड़ा दिखाई दे रहा था। इन वीडियो ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया था। उस समय निहंगों के एक गुट ने दावा किया था कि लखबीर सिंह पर गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का आरोप था, जिसके चलते यह घटना हुई।

हालांकि, अदालत में इन दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके। यही कारण रहा कि कोर्ट ने चारों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।

यह मामला न केवल कानून व्यवस्था बल्कि सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता के लिहाज से भी बेहद अहम माना गया था। फैसले के बाद एक बार फिर न्याय प्रक्रिया और जांच की गुणवत्ता पर सवाल उठ सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में मजबूत जांच और पुख्ता सबूत बेहद जरूरी होते हैं, ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके और दोषियों को सजा मिल सके।

कुल मिलाकर, इस फैसले ने एक बहुचर्चित मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब सभी की नजरें बाकी आरोपियों पर चल रही कानूनी प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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