19 Apr 2026, Sun

26 साल पुराना टीवी शो, जिसमें ‘दशावतार’ की दिखाई गई गाथा, IMDb पर मिली है 8.7 रेटिंग

26 साल बाद भी कायम है ‘विष्णु पुराण’ का जादू, ओटीटी पर फिर बढ़ी लोकप्रियता

नई दिल्ली: भारतीय टेलीविजन के स्वर्णिम दौर में बने धार्मिक धारावाहिक आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखते हैं। बी आर चोपड़ा द्वारा निर्मित विष्णु पुराण ऐसा ही एक शो है, जिसने साल 2000 में प्रसारित होकर घर-घर में पहचान बनाई थी। ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ जैसे ऐतिहासिक धारावाहिकों के बाद यह शो भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा और अब 26 साल बाद फिर से चर्चा में है।

दूरदर्शन का सुपरहिट शो

विष्णु पुराण का पहला एपिसोड 23 जनवरी 2000 को प्रसारित हुआ था और इसका आखिरी एपिसोड 16 जून 2002 को ऑन एयर हुआ। उस समय यह शो दूरदर्शन पर प्रसारित होता था और धार्मिक व पारिवारिक दर्शकों के बीच बेहद पसंद किया गया। इसकी कहानी, प्रस्तुति और संवाद शैली ने इसे उस दौर के सबसे सफल पौराणिक शोज में शामिल कर दिया।

कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान जब पुराने क्लासिक शोज को दोबारा प्रसारित किया गया, तब भी इस धारावाहिक को दर्शकों ने भरपूर प्यार दिया। यही वजह है कि आज भी यह शो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड करता रहता है।

भगवान विष्णु के दशावतार की कहानी

यह शो भगवान विष्णु के जीवन और उनके दस अवतारों पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे भगवान विष्णु समय-समय पर पृथ्वी पर अवतार लेकर बुराई का अंत करते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं। शो में अच्छाई और बुराई के संघर्ष को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

इस धारावाहिक में नीतीश भारद्वाज ने भगवान विष्णु की भूमिका निभाई थी, जबकि देवी लक्ष्मी के रूप में वैदेही अमृते नजर आई थीं। खास बात यह है कि नीतीश भारद्वाज इससे पहले महाभारत में भगवान कृष्ण का किरदार निभाकर पहले ही लोकप्रिय हो चुके थे।

शानदार स्टार कास्ट और कहानी

शो में कुलभूषण खरबंदा, विक्रम गोखले, सुरेंद्र पाल और राजेश्वरी सचदेव जैसे दिग्गज कलाकारों ने भी अहम भूमिकाएं निभाईं। इसकी कहानी को लता हया ने ‘धरती मां’ के रूप में प्रस्तुत किया, जिसने इसे और भी प्रभावशाली बना दिया।

ओटीटी और यूट्यूब पर उपलब्ध

आज के डिजिटल दौर में भी विष्णु पुराण की लोकप्रियता बनी हुई है। इस शो को आप YouTube पर मुफ्त में देख सकते हैं, जबकि यह ZEE5 पर भी उपलब्ध है। IMDb पर इसे 8.7 की शानदार रेटिंग मिली है, जो इसकी गुणवत्ता को दर्शाती है।

क्यों फिर बढ़ रहा है क्रेज?

आज के दर्शक जहां एक तरफ एक्शन और ड्रामा से भरपूर कंटेंट देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धार्मिक और आध्यात्मिक कंटेंट की ओर भी रुझान बढ़ रहा है। ऐसे में ‘विष्णु पुराण’ जैसे क्लासिक शो फिर से लोगों की पसंद बनते जा रहे हैं।

निष्कर्ष

‘विष्णु पुराण’ केवल एक टीवी शो नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। 26 साल बाद भी इसकी कहानी और संदेश उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने इसके प्रसारण के समय थे। यही वजह है कि यह शो आज भी नई पीढ़ी के बीच अपनी पहचान बनाए हुए है।

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