इजरायल और लेबनान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता से हुए सीजफायर के बाद हालात में धीरे-धीरे शांति लौटती नजर आ रही है। दोनों देशों के बीच फिलहाल 10 दिनों के संघर्ष विराम पर सहमति बनी है, जिससे लंबे समय से चल रहे तनाव और हिंसा के बीच फंसे हजारों विस्थापित लोगों को राहत मिली है। हालांकि, लेबनानी प्रशासन की चेतावनी के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं।
सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटों के भीतर दक्षिणी लेबनान की ओर जाने वाले रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। लोग अपने जरूरी सामान के साथ अपने घरों की ओर लौटते नजर आए। लिटानी नदी पर बने क्षतिग्रस्त कासमीयेह पुल पर भी भारी आवाजाही देखी गई, जो दक्षिणी तटीय शहर तायर को उत्तरी हिस्सों से जोड़ता है। इस दौरान सड़कें धीरे-धीरे वाहनों से भरती चली गईं और घर वापसी का सिलसिला तेज हो गया।
गौरतलब है कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण लेबनान में 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके थे। सीजफायर की घोषणा के बाद इन लोगों ने राहत की सांस ली और अपने-अपने घरों की ओर लौटना शुरू कर दिया। हालांकि, अधिकारियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी थी कि सुरक्षा स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं है, इसलिए लोग तुरंत अपने घरों में वापसी से बचें।
चेतावनी के बावजूद कई परिवार जोखिम उठाकर अपने घरों तक पहुंचे, जहां उन्हें तबाही का मंजर देखने को मिला। कई इलाकों में टूटी हुई इमारतें, मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और लटकते हुए बिजली के तारों ने हालात की गंभीरता को दर्शाया। वर्षों से बसे घर अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, जिससे लौटे हुए लोगों के सामने फिर से जीवन को पटरी पर लाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
इस बीच, स्थानीय लोगों की भावनाएं भी सामने आईं। 23 वर्षीय जैनब ने कहा कि घर लौटकर उन्हें आजादी का एहसास तो हुआ, लेकिन अपने शहर को तबाह देखकर दर्द भी महसूस हो रहा है। वहीं 27 वर्षीय मेडिकल कर्मी अली वहदान, जो पहले हवाई हमले में घायल हो चुके हैं, ने कहा कि वह नहीं मानते कि यह शांति स्थायी है और संघर्ष आगे भी जारी रह सकता है।
दक्षिण बेरूत के हारेत हरेक इलाके में हालात और भी खराब नजर आए, जहां इजरायली हमलों के बाद पूरी-की-पूरी इमारतें मलबे में बदल गई हैं। इसके बावजूद कुछ लोग अपने इलाकों में लौटकर हिजबुल्लाह के समर्थन में झंडे लहराते नजर आए। वहीं कुछ लोगों ने अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप को शांति का कारण बताया।
कुल मिलाकर, सीजफायर ने जहां एक ओर लोगों को अस्थायी राहत दी है, वहीं दूसरी ओर तबाह हो चुके घर और अस्थिर हालात यह संकेत दे रहे हैं कि क्षेत्र में स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह संघर्ष विराम स्थायी शांति में बदल पाता है या तनाव एक बार फिर बढ़ता है।

