नई दिल्ली में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने 16 से 18 अप्रैल के बीच होने वाले संसद के विशेष सत्र को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह देश में महिलाओं को सशक्त प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि दशकों से महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की मांग उठती रही है, लेकिन अब समय आ गया है कि इस लंबे इंतजार को समाप्त किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है और आगामी विशेष सत्र इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए बुलाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में नए संसद भवन में Nari Shakti Vandan Adhiniyam के रूप में एक महत्वपूर्ण पहल की गई थी। इस कानून का उद्देश्य महिलाओं को राजनीति में अधिक अवसर देना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह अधिनियम देश के सामाजिक और राजनीतिक ढांचे में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
पीएम मोदी ने कहा कि 16, 17 और 18 अप्रैल की तारीखें देश के लिए बेहद अहम होंगी, क्योंकि इन दिनों में संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर ठोस फैसले लिए जाएंगे। उन्होंने इस विशेष सत्र को “नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पड़ाव” बताया।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन’ अभियान को देशभर की महिलाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि करोड़ों माताओं और बहनों का आशीर्वाद इस पहल को और मजबूती दे रहा है, जिससे सरकार को इस दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Nari Shakti Vandan Adhiniyam को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे न केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया में विविधता आएगी, बल्कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों को भी बेहतर तरीके से उठाया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी रेखांकित किया कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल सामाजिक या आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें राजनीतिक स्तर पर भी समान अवसर मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होंगी, तो देश का विकास और अधिक संतुलित और समावेशी होगा।
फिलहाल, सभी की नजरें 16 से 18 अप्रैल के इस विशेष सत्र पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस दौरान महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए कौन से ठोस कदम उठाती है और यह पहल देश की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है।

