11 Apr 2026, Sat

ईरान के साथ डबल गेम खेल रहा है पाकिस्तान? सऊदी अरब में तैनात कर दी अपनी आर्मी

पाकिस्तान का सऊदी अरब में सैन्य तैनाती कदम, ईरान-अमेरिका वार्ता के बीच बढ़ी ‘डबल गेम’ की चर्चा

इस्लामाबाद: एक तरफ जहां पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब के साथ अपने रक्षा सहयोग को मजबूत करते हुए पाकिस्तानी सेना की तैनाती ने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस घटनाक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की विदेश नीति और उसकी रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।

सऊदी अरब में पाकिस्तानी सेना की तैनाती

सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तानी सैन्य बलों को किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर तैनात किया गया है। इस तैनाती में लड़ाकू विमान, सहायक विमान और आर्मी के जवान शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये बल शनिवार को सऊदी अरब पहुंचे।

यह वही एयर बेस है जो हाल के वर्षों में ईरान के साथ तनाव के दौरान ड्रोन और मिसाइल हमलों की चपेट में रहा था। ऐसे संवेदनशील समय में पाकिस्तानी सेना की तैनाती को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

रक्षा समझौते के तहत बढ़ा सहयोग

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सितंबर में एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता हुआ था। इस समझौते के अनुसार, यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसी समझौते के तहत अब सैन्य सहयोग और संयुक्त सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।

सऊदी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस तैनाती का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य समन्वय बढ़ाना और क्षेत्रीय तथा वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करना है।

ईरान-अमेरिका वार्ता के बीच बढ़ा राजनीतिक तनाव

दूसरी ओर, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच उच्चस्तरीय शांति वार्ता जारी है। इस वार्ता में कई देशों की भूमिका भी सामने आ रही है, जिससे यह प्रक्रिया और जटिल होती जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, मिस्र, सऊदी अरब, चीन और कतर के अधिकारी भी इस्लामाबाद में मौजूद हैं और अप्रत्यक्ष रूप से मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं।

‘डबल गेम’ की आशंका

एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता और दूसरी तरफ सऊदी अरब में पाकिस्तानी सेना की तैनाती ने कई विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इस घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान की नीयत और उसकी विदेश नीति पर सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान एक साथ कई मोर्चों पर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इससे उसकी कूटनीतिक स्थिति जटिल होती जा रही है।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल की पीएम शहबाज से मुलाकात

इसी बीच, ईरान के प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागैर गालिबफ कर रहे हैं, ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। हालांकि इस बैठक को लेकर न तो ईरान और न ही प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। सऊदी अरब, ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जटिल राजनीतिक स्थिति में पाकिस्तान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती जा रही है।

निष्कर्ष

पाकिस्तान का एक तरफ सऊदी अरब के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाना और दूसरी तरफ ईरान-अमेरिका शांति वार्ता में मध्यस्थता करना, उसकी बहुस्तरीय विदेश नीति को दर्शाता है। हालांकि, इन दोनों घटनाओं ने क्षेत्रीय राजनीति में ‘डबल गेम’ की चर्चाओं को भी जन्म दे दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह रणनीति पाकिस्तान के लिए कितनी सफल या चुनौतीपूर्ण साबित होती है।

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