‘सुरभि’: 90 के दशक का वो शो जिसने भारतीय संस्कृति को घर-घर पहुंचाया, आज भी कायम है जादू
भारतीय टेलीविजन का 80 और 90 का दशक सादगी, पारिवारिक मूल्यों और मजबूत कंटेंट के लिए जाना जाता है। उस दौर में जब मनोरंजन के साधन सीमित थे, Doordarshan हर घर का हिस्सा हुआ करता था। इसी स्वर्णिम दौर में एक ऐसा शो आया जिसने न सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें भारत की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और इतिहास से भी जोड़ दिया। हम बात कर रहे हैं चर्चित सांस्कृतिक कार्यक्रम Surabhi की।
एक शो नहीं, सांस्कृतिक यात्रा थी ‘सुरभि’
साल 1990 में शुरू हुआ ‘सुरभि’ सिर्फ एक टीवी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह भारत की विविधता को दर्शाने वाला एक जीवंत दस्तावेज था। इस शो को Siddharth Kak और Renuka Shahane ने होस्ट किया। खास बात यह रही कि सिद्धार्थ काक इस शो के सह-निर्माता भी थे, जिसने इसकी गुणवत्ता और प्रस्तुति को एक अलग स्तर पर पहुंचाया।
यह शो 1990 से 2001 तक प्रसारित हुआ और इस दौरान कुल 415 एपिसोड्स के जरिए इसने भारतीय कला, लोक परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों और सामाजिक जीवन के अनछुए पहलुओं को दर्शकों तक पहुंचाया। आज भी IMDb पर 8.8 की शानदार रेटिंग के साथ ‘सुरभि’ को भारतीय टेलीविजन के सबसे बेहतरीन कार्यक्रमों में गिना जाता है।
लोकप्रियता का ऐसा दौर, जो आज भी मिसाल
‘सुरभि’ की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसका नाम Limca Book of Records में दर्ज है। उस समय न इंटरनेट था और न ही सोशल मीडिया, लेकिन दर्शकों का प्यार चिट्ठियों के जरिए झलकता था।
हर हफ्ते इस शो को लाखों चिट्ठियां मिलती थीं और कई बार यह संख्या 10 लाख तक पहुंच जाती थी। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड था, जिसने इसे देश के सबसे ज्यादा इंटरैक्टिव शो में शामिल कर दिया। दर्शकों की भागीदारी और उनके सवालों को शो में शामिल करना ‘सुरभि’ की सबसे बड़ी ताकत थी।
रेणुका शहाणे के करियर का टर्निंग पॉइंट
‘सुरभि’ ने Renuka Shahane को घर-घर में पहचान दिलाई। उनकी सरलता, मधुर मुस्कान और सहज प्रस्तुति ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में उन्होंने इस शो के ऑडिशन को लेकर संदेह जताया था, लेकिन बाद में यही कार्यक्रम उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।
क्यों आज भी खास है ‘सुरभि’?
आज के दौर में जहां टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर हाई बजट और ग्लैमरस कंटेंट का बोलबाला है, वहीं ‘सुरभि’ जैसे शो की सादगी और गहराई आज भी लोगों को आकर्षित करती है। यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति की उस असली तस्वीर को दिखाता है, जिसे समय के साथ कहीं पीछे छोड़ दिया गया है।
निष्कर्ष
‘सुरभि’ सिर्फ एक शो नहीं, बल्कि भारतीय टेलीविजन के स्वर्णिम युग की पहचान है। इसने यह साबित किया कि बिना किसी तड़क-भड़क के भी कंटेंट दर्शकों के दिलों पर राज कर सकता है। आज भी जब भारतीय संस्कृति और टेलीविजन इतिहास की बात होती है, तो ‘सुरभि’ का नाम गर्व से लिया जाता है।

