Air India Fare Hike: फ्यूल सरचार्ज बढ़ने से हवाई सफर महंगा, नई दरें लागू
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन Air India ने यात्रियों को बड़ा झटका देते हुए अपने फ्यूल सरचार्ज ढांचे में बदलाव की घोषणा की है। यह नया बदलाव 8 अप्रैल से लागू हो गया है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों के किराए में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
एयरलाइन ने 7 अप्रैल को जारी अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह फैसला वैश्विक स्तर पर जेट फ्यूल यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण लिया गया है। कंपनी का कहना है कि बढ़ती लागत को संतुलित करने के लिए यह कदम जरूरी था।
घरेलू उड़ानों के लिए नया फ्यूल सरचार्ज
एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों के लिए अब तक लागू फ्लैट सरचार्ज को खत्म कर दिया है और इसकी जगह दूरी आधारित नया सरचार्ज सिस्टम लागू किया है। नई दरें इस प्रकार हैं:
- 0 से 500 किमी: ₹299
- 501 से 1,000 किमी: ₹399
- 1,001 से 1,500 किमी: ₹549
- 1,501 से 2,000 किमी: ₹749
- 2,000 किमी से अधिक: ₹899
इस बदलाव का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ेगा, खासकर लंबी दूरी की उड़ानों पर।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर
एयर इंडिया ने संकेत दिया है कि अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर भी फ्यूल सरचार्ज में संशोधन किया गया है। इससे विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को भी अब अधिक किराया देना पड़ सकता है। हालांकि, जिन यात्रियों की टिकट पहले से बुक है, उन पर यह नया सरचार्ज लागू नहीं होगा, जब तक कि वे अपनी यात्रा की तारीख या योजना में बदलाव नहीं करते।
जेट फ्यूल की कीमतों में तेजी
जानकारी के अनुसार, 27 मार्च 2026 को समाप्त सप्ताह में जेट फ्यूल की औसत वैश्विक कीमत बढ़कर 195.19 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जो फरवरी के अंत में 99.40 डॉलर प्रति बैरल थी। यानी इसमें लगभग 100% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में यह उछाल दो मुख्य कारणों से आया है—कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और रिफाइनरी मार्जिन (क्रैक स्प्रेड) में वृद्धि। इन दोनों कारणों ने मिलकर एयरलाइंस की लागत को काफी बढ़ा दिया है।
यात्रियों पर असर
इस बदलाव के बाद अब हवाई यात्रा पहले की तुलना में महंगी हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जेट फ्यूल की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही, तो आने वाले समय में एयरलाइन टिकटों के दाम और भी बढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
एयर इंडिया का यह फैसला बढ़ती ईंधन लागत का सीधा असर है, जिसका भार अब यात्रियों को उठाना पड़ेगा। जहां एक ओर यह एयरलाइन के लिए लागत प्रबंधन का कदम है, वहीं यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च का कारण बन सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य एयरलाइंस भी इसी तरह के कदम उठाती हैं।

