Voting Holiday 2026: चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, वोटिंग वाले दिन मिलेगी पेड छुट्टी
देश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय चुनाव आयोग ने बड़ा ऐलान किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदान होना है, वहां वोटिंग के दिन सार्वजनिक अवकाश रहेगा। खास बात यह है कि इस दिन कर्मचारियों को न केवल छुट्टी मिलेगी, बल्कि उनका वेतन भी नहीं काटा जाएगा।
चुनाव आयोग का यह फैसला लोकतंत्र में हर नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। आयोग ने कहा है कि मतदान करना हर नागरिक का अधिकार है और किसी भी व्यक्ति को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
किन राज्यों में होगी वोटिंग
इस बार जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव होने हैं, उनमें असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी शामिल हैं। इन सभी जगहों पर मतदान के दिन स्थानीय स्तर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाएगा।
कब-कब होगी वोटिंग
चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार:
- 9 अप्रैल 2026 — असम, केरल और पुडुचेरी
- 23 अप्रैल 2026 — तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल (पहला चरण)
- 29 अप्रैल 2026 — पश्चिम बंगाल (दूसरा चरण)
इन तारीखों पर संबंधित क्षेत्रों में छुट्टी लागू रहेगी, ताकि अधिक से अधिक लोग मतदान कर सकें।
सभी कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
आयोग ने यह भी साफ किया है कि यह छुट्टी सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं होगी। निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी पेड लीव दी जाएगी। यहां तक कि दिहाड़ी मजदूरों को भी इस दिन का पूरा वेतन मिलेगा।
अगर कोई कर्मचारी अपने मतदान क्षेत्र से बाहर काम कर रहा है, तो उसे भी वोट डालने के लिए छुट्टी देना अनिवार्य होगा।
कानून क्या कहता है?
यह प्रावधान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B के तहत लागू किया गया है। इसके अनुसार, किसी भी नियोक्ता को अपने कर्मचारियों को मतदान के दिन छुट्टी देनी होगी। यदि कोई संस्था इस नियम का पालन नहीं करती, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
चुनावी माहौल तेज
इन राज्यों में चुनावी माहौल अब तेज हो चुका है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं और प्रचार अभियान भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों में चुनाव को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।
लोकतंत्र के लिए अहम कदम
चुनाव आयोग का यह कदम लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि नौकरी या काम के कारण कोई भी मतदाता अपने मतदान अधिकार से वंचित न रहे।
कुल मिलाकर, आयोग का यह फैसला न केवल मतदाता भागीदारी बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि यह भी संदेश देता है कि लोकतंत्र में हर वोट की अहमियत है।

