पंजाब में होने वाले नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव अब बैलेट पेपर के जरिए ही कराए जाएंगे। इस फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है, जिससे राज्य चुनाव आयोग का निर्णय बरकरार रह गया है।
यह याचिका EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) से चुनाव कराने की मांग को लेकर दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि स्थानीय निकाय चुनावों में अचानक EVM से हटकर बैलेट पेपर पर लौटने का फैसला प्रशासनिक आदेश के जरिए लिया गया है, जिसके लिए न तो कोई वैधानिक संशोधन किया गया और न ही जनता से परामर्श लिया गया।
हालांकि हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि राज्य चुनाव आयोग के निर्णय में हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके साथ ही 2026 के नगरपालिका चुनावों से पहले दायर इस याचिका पर कोई राहत नहीं दी गई।
पंजाब में स्थानीय निकाय चुनाव 26 मई को होंगे, जबकि वोटों की गिनती 29 मई को की जाएगी। इन चुनावों में इस बार बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे राज्य में एक बार फिर पुरानी मतदान प्रणाली की वापसी हो रही है।
याचिका में यह भी कहा गया था कि EVM और VVPAT प्रणाली बूथ कैप्चरिंग और फर्जी वोटिंग जैसी समस्याओं को रोकने में अधिक सुरक्षित मानी जाती है। साथ ही यह तर्क दिया गया कि बैलेट पेपर पर वापसी किसी तकनीकी कमी के कारण नहीं, बल्कि प्रशासनिक निर्णय के आधार पर की गई है, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं।
फिलहाल हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद पंजाब में स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से ही कराए जाएंगे और EVM से जुड़े बदलावों पर रोक लगाने की मांग को अदालत ने स्वीकार नहीं किया।

