ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की अमेरिकियों को चिट्ठी, ट्रंप की नीति और युद्ध पर उठाए सवाल
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच Masoud Pezeshkian ने अमेरिकी नागरिकों के नाम एक खुली चिट्ठी लिखकर मौजूदा युद्ध और अमेरिकी नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस चिट्ठी में उन्होंने Donald Trump की “अमेरिका फर्स्ट” नीति की आलोचना करते हुए पूछा कि आखिर इस युद्ध से आम अमेरिकी नागरिकों को क्या लाभ मिल रहा है।
पेजेश्कियन ने अपने संदेश में कहा कि अमेरिकी जनता को “भ्रामक और बनावटी कथाओं” से आगे बढ़कर वास्तविक स्थिति को समझने की जरूरत है। उन्होंने सवाल किया कि क्या निर्दोष लोगों की मौत, स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे का विनाश और किसी देश को “पाषाण युग में लौटाने” जैसी धमकियां वास्तव में अमेरिका के हितों की रक्षा करती हैं या उसकी वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।
ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि Iran किसी भी देश के लिए खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा कूटनीतिक समाधान और बहुपक्षीय वार्ता का समर्थन करता रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब ईरान परमाणु वार्ताओं में शामिल था, तब भी उस पर हमले किए गए, जिससे यह साबित होता है कि युद्ध का उद्देश्य शांति स्थापित करना नहीं बल्कि तनाव बढ़ाना है।
पेजेश्कियन ने अपने पत्र में Israel पर भी आरोप लगाया कि वह अपने हितों के लिए अमेरिका का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि इजरायल लंबे समय से अमेरिका को ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए उकसाता रहा है और इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या अमेरिका इस संघर्ष में एक “प्रॉक्सी” की तरह काम कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की ऊर्जा और औद्योगिक संरचनाओं पर हमले सीधे तौर पर आम नागरिकों को प्रभावित करते हैं और ये अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीर अपराध हैं। ऐसे हमले न केवल मानवीय संकट को बढ़ाते हैं, बल्कि आर्थिक अस्थिरता भी पैदा करते हैं, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।
यह चिट्ठी उस समय आई है जब हाल ही में Donald Trump ने Strait of Hormuz को लेकर कड़ा बयान देते हुए ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। ट्रंप ने कहा था कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान पर और कड़े कदम उठाएगा।
हालांकि, ईरान ने अमेरिका के इस दावे को खारिज कर दिया है कि उसने युद्धविराम की अपील की है। पेजेश्कियन ने अपनी चिट्ठी में दोहराया कि ईरान किसी भी देश या जनता के प्रति शत्रुता नहीं रखता और वह केवल अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खुली चिट्ठी एक कूटनीतिक कदम है, जिसके जरिए ईरान सीधे अमेरिकी जनता तक अपनी बात पहुंचाना चाहता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि युद्ध के बीच संवाद और जनमत को प्रभावित करने की कोशिशें तेज हो रही हैं।
कुल मिलाकर, इस चिट्ठी ने मौजूदा संघर्ष पर एक नई बहस को जन्म दिया है और यह सवाल खड़ा किया है कि इस युद्ध के असली लाभार्थी कौन हैं—सरकारें या आम जनता।

