मिडिल-ईस्ट युद्ध का 22वां दिन: ईरान का डिएगो गार्सिया पर हमला, क्षेत्रीय तनाव चरम पर
मध्य पूर्व में जारी ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध का आज 22वां दिन है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ईरान ने अब अपने हमलों का दायरा बढ़ाते हुए हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया में मौजूद अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे को निशाना बनाया है। माना जा रहा है कि इस हमले में खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया, जिसकी मारक क्षमता 4000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह हमला ईरान की सैन्य क्षमता और उसकी लंबी दूरी तक प्रहार करने की ताकत को दर्शाता है। खोर्रमशहर-4 मिसाइल को मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल माना जाता है, जो क्लस्टर वारहेड जैसे उन्नत हथियार ले जाने में सक्षम है। विश्लेषकों का मानना है कि इसकी पहुंच यूरोप के कई हिस्सों तक हो सकती है, जिससे फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के लिए भी खतरा बढ़ गया है।
इधर अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले लगातार जारी हैं। दोनों देशों का कहना है कि वे ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि ईरान इन हमलों का जवाब देते हुए नए-नए मोर्चे खोल रहा है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका की नहीं है, बल्कि उन देशों और कंपनियों की है जो यहां व्यापार करते हैं। उनके इस बयान को अमेरिका की बदलती रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, क्षेत्रीय देशों में भी इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। कतर, जॉर्डन और मिस्र ने दक्षिणी सीरिया में इजरायल द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है।
इसी बीच लेबनान में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं। दक्षिणी लेबनान के डेर एज़-ज़हरानी क्षेत्र में इजरायली हवाई हमले में कम से कम 21 लोग घायल हो गए हैं। वहीं, लेबनान की आपदा प्रबंधन इकाई के अनुसार, ताजा हमलों में करीब 20 लोगों की मौत हुई है। घायलों में महिलाएं भी शामिल हैं, जिससे नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अब सिर्फ तीन देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व और उससे बाहर के क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है। तेल आपूर्ति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके गंभीर असर पड़ रहे हैं।
कुल मिलाकर, 22वें दिन भी युद्ध के समाप्त होने के कोई संकेत नहीं हैं। लगातार हो रहे हमले और बढ़ती आक्रामक बयानबाजी से साफ है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भी व्यापक और खतरनाक रूप ले सकता है।

