रूस-यूक्रेन युद्ध पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान:
पुतिन-जेलेंस्की की “गहरी नफरत” शांति समझौते में सबसे बड़ी बाधा, फिर भी युद्ध खत्म होने की उम्मीद
Washington DC | International Affairs | Russia-Ukraine War
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बार फिर बड़ा और चर्चित बयान दिया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच गहरी नफरत ही इस युद्ध को समाप्त करने की राह में सबसे बड़ी बाधा है। हालांकि इसके बावजूद ट्रंप ने यह दावा भी किया कि शांति समझौते की दिशा में “अच्छी प्रगति” हो रही है और युद्ध समाप्त होने की उम्मीद अब भी बनी हुई है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच निजी दुश्मनी और अविश्वास का स्तर इतना अधिक है कि किसी भी तरह की सीधी बातचीत या समझौते को अंजाम तक पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
“वे एक-दूसरे से नफरत करते हैं” – ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा:
“जेलेंस्की और पुतिन एक-दूसरे से नफरत करते हैं। यह नफरत इतनी गहरी है कि किसी भी शांति प्रयास को बेहद जटिल बना देती है। लेकिन इसके बावजूद मुझे लगता है कि हम किसी समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं।”
ट्रंप के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक खुले और असाधारण स्वीकारोक्ति के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर वैश्विक नेता इस तरह की व्यक्तिगत भावनाओं को सार्वजनिक मंच पर स्वीकार नहीं करते।
रूस-यूक्रेन युद्ध: अब तक की पृष्ठभूमि
रूस-यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था, जब रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य आक्रमण किया। इसके बाद:
लाखों लोग विस्थापित हुए
हजारों नागरिकों की मौत हुई
यूरोप में ऊर्जा संकट गहराया
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा
नाटो और रूस के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया
यूक्रेन को अमेरिका और पश्चिमी देशों से भारी सैन्य और आर्थिक सहायता मिली, जबकि रूस ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रभाव क्षेत्र से जोड़कर देखा।
ट्रंप का दावा: “हम समझौते के करीब हैं”
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि पर्दे के पीछे कूटनीतिक स्तर पर लगातार बातचीत और दबाव जारी है।
उनका कहना है:
“मुझे लगता है कि इसे सुलझाने का अच्छा मौका है। हम बहुत करीब हैं। यह आसान नहीं है, लेकिन संभव जरूर है।”
हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह प्रगति किस स्तर पर हो रही है — क्या यह सीधी बातचीत, मध्यस्थ देशों, या गुप्त कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से हो रही है।
“मैंने खुद पुतिन से गुजारिश की” – ट्रंप का चौंकाने वाला खुलासा
इससे पहले एक कैबिनेट मीटिंग में ट्रंप ने खुलासा किया था कि उन्होंने खुद राष्ट्रपति पुतिन से फोन पर बात कर कीव और अन्य शहरों पर हमले रोकने की गुजारिश की थी।
ट्रंप के अनुसार:
“मैंने राष्ट्रपति पुतिन से कहा कि कम से कम एक हफ्ते तक कीव और दूसरे शहरों पर गोलीबारी न करें। उन्होंने इस पर सहमति जताई। बहुत से लोगों ने कहा था कि फोन मत करो, वे तुम्हारी बात नहीं मानेंगे, लेकिन उन्होंने मानी।”
यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह दर्शाता है कि ट्रंप और पुतिन के बीच सीधा संवाद अभी भी प्रभावी माना जाता है।
भीषण सर्दी बनी मानवीय चिंता
ट्रंप ने अपनी अपील के पीछे भीषण ठंड का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और रूस के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी पड़ रही है, जिससे आम नागरिकों की स्थिति बेहद खराब हो गई है।
उनके शब्दों में:
“यह सिर्फ ठंड नहीं है, यह असाधारण ठंड है। ऐसी ठंड जो लोगों की जान ले सकती है। ऐसे समय में बमबारी और हमले मानवीय संकट को और बढ़ा देते हैं।”
जमीन पर हकीकत: लड़ाई अब भी जारी
ट्रंप के दावों के बावजूद, जमीनी हालात पूरी तरह अलग नजर आ रहे हैं।
यूक्रेन के अधिकारियों के अनुसार:
दक्षिणी जपोरिझिया क्षेत्र में रूसी ड्रोन हमलों में 3 नागरिकों की मौत
कई रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त
ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया
वहीं राष्ट्रपति जेलेंस्की ने चेतावनी दी है कि रूस एक और बड़े हमले की तैयारी कर रहा है।
जेलेंस्की की प्रतिक्रिया: “रूस पर भरोसा नहीं”
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की पहले भी कई बार कह चुके हैं कि:
रूस के वादों पर भरोसा नहीं किया जा सकता
युद्धविराम का इस्तेमाल रूस अपनी सैन्य तैयारी के लिए करता है
शांति तभी संभव है जब रूस यूक्रेन की संप्रभुता को पूरी तरह स्वीकार करे
जेलेंस्की की नजर में किसी भी समझौते का मतलब यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं होना चाहिए।
पुतिन का रुख: रणनीतिक चुप्पी
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप के बयानों पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि क्रेमलिन का रुख अब भी यही है कि:
पश्चिमी देश युद्ध को लंबा खींच रहे हैं
यूक्रेन नाटो का “प्रॉक्सी” बन चुका है
रूस अपने “राष्ट्रीय हितों” से समझौता नहीं करेगा
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
🇪🇺 यूरोपीय यूनियन
यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप के बयान का सावधानी से स्वागत किया है, लेकिन कहा है कि सिर्फ बयानबाजी से शांति नहीं आएगी।
🇨🇳 चीन
चीन ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति पर जोर देते हुए कहा कि युद्ध का कोई सैन्य समाधान नहीं है।
🇮🇳 भारत
भारत ने अपने संतुलित रुख को दोहराते हुए कहा कि:
“संवाद और कूटनीति ही आगे का रास्ता है।”
क्या ट्रंप बन सकते हैं “डील-मेकर”?
डोनाल्ड ट्रंप खुद को लंबे समय से “डील-मेकर” के रूप में पेश करते रहे हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि:
ट्रंप पुतिन से सीधे बात कर सकते हैं
वे जेलेंस्की पर भी दबाव बना सकते हैं
वे पश्चिमी देशों को समझौते के लिए राजी कर सकते हैं
हालांकि आलोचकों का कहना है कि ट्रंप की रणनीति अस्पष्ट और जोखिम भरी हो सकती है।
क्या शांति समझौता संभव है?
विशेषज्ञों के अनुसार शांति समझौते के लिए जरूरी है:
विश्वसनीय युद्धविराम
अंतरराष्ट्रीय गारंटी
सीमाओं पर स्पष्ट सहमति
यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करना
रूस पर प्रतिबंधों का भविष्य तय करना
जब तक पुतिन और जेलेंस्की के बीच विश्वास की कमी बनी रहेगी, तब तक समझौता आसान नहीं होगा।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप का बयान एक तरफ उम्मीद जगाता है, तो दूसरी तरफ युद्ध की कड़वी सच्चाई को भी उजागर करता है। पुतिन और जेलेंस्की के बीच गहरी नफरत, अविश्वास और राजनीतिक मजबूरियां शांति की राह में सबसे बड़ी दीवार बनी हुई हैं।
फिलहाल दुनिया यही देख रही है कि क्या ट्रंप की कूटनीति वास्तव में इतिहास का रुख बदल पाएगी, या रूस-यूक्रेन युद्ध अभी और लंबा खिंचेगा।

