पायलटों के साप्ताहिक आराम में कोई ढील नहीं: DGCA का दिल्ली हाई कोर्ट में बड़ा बयान, इंडिगो को छूट सिर्फ 10 फरवरी तक
दिल्ली हाई कोर्ट में शुक्रवार को विमानन सुरक्षा से जुड़ी एक अहम जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई हुई। इस दौरान डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया कि पायलटों के लिए अनिवार्य साप्ताहिक आराम (Weekly Rest) में किसी भी तरह की कोई ढील नहीं दी गई है। एविएशन रेगुलेटर ने कहा कि साप्ताहिक आराम की शर्त पूरी तरह से लागू है और इसे न तो वापस लिया गया है और न ही इसमें कोई नरमी बरती गई है।
केंद्र सरकार, DGCA और इंडिगो को नोटिस
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, DGCA और इंडिगो एयरलाइंस का संचालन करने वाली इंटरग्लोब एविएशन को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उस जनहित याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों के तहत दी गई छूट को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि DGCA ने एयरलाइन सेवाओं में व्यवधान के बाद नए नियमों को स्थगित कर दिया है, जो कानूनन सही नहीं है।
DGCA का कोर्ट में पक्ष
DGCA की ओर से पेश हुईं एडवोकेट अंजना गोसाईं ने कोर्ट को बताया कि पायलटों के लिए साप्ताहिक आराम की अनिवार्यता पूरी तरह से प्रभावी है। उन्होंने कहा कि इस नियम में किसी भी एयरलाइन के लिए कोई छूट नहीं दी गई है। DGCA ने यह भी साफ किया कि सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है।
इंडिगो को सीमित और अस्थायी छूट
DGCA ने कोर्ट को यह भी बताया कि रात्रि संचालन (Night Operations) के संबंध में केवल इंडिगो एयरलाइंस को ही कुछ सीमित छूट दी गई है। यह छूट भी स्थायी नहीं है और सिर्फ 10 फरवरी 2026 तक ही लागू रहेगी। DGCA के अनुसार, यह फैसला ऑपरेशनल कारणों और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अस्थायी रूप से लिया गया है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप
यह जनहित याचिका सबरी रॉय लेंका और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि DGCA के पास नियमों को निलंबित या स्थगित रखने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि नियम बनाए गए हैं, तो उन्हें पूरी सख्ती से लागू किया जाना चाहिए, खासकर जब मामला यात्रियों और पायलटों की सुरक्षा से जुड़ा हो।
FDTL नियम क्यों हैं अहम
DGCA ने वर्ष 2025 में संशोधित FDTL मानदंड पेश किए थे, जिनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय थकान-जोखिम मानकों के अनुरूप पायलटों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इन नियमों के तहत पायलटों के ड्यूटी घंटे सीमित किए गए, आराम की अवधि बढ़ाई गई और रात में लैंडिंग की संख्या कम करने पर जोर दिया गया। इन सुधारों का मकसद उड़ान सुरक्षा को और मजबूत करना है।
अगली सुनवाई पर टिकी नजर
फिलहाल, हाई कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान यह साफ होगा कि संशोधित FDTL नियमों को लेकर अदालत क्या रुख अपनाती है। यह मामला न केवल विमानन उद्योग बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

