देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर में लगातार खराब होती हवा अब आम लोगों के साथ-साथ संसद की चिंता का भी विषय बन गई है। लंबे समय से दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बेहद खराब श्रेणी में बना हुआ है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए संसद के शीतकालीन सत्र में अब वायु प्रदूषण पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
संसद के शीतकालीन सत्र के 14वें दिन दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है। लोकसभा में नियम 193 के तहत इस विषय को उठाया गया, जिसमें विभिन्न दलों के सांसदों ने हिस्सा लिया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, डीएमके सांसद कनिमोझी और भारतीय जनता पार्टी की सांसद बांसुरी स्वराज ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर अपने-अपने विचार रखे और सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।
सांसदों ने कहा कि राजधानी में लगातार खराब हवा लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बन चुकी है। कई सदस्यों ने प्रदूषण के लिए पराली जलाने, वाहनों के धुएं, औद्योगिक प्रदूषण और निर्माण कार्यों को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही यह भी कहा गया कि समस्या से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है।
संसद का शीतकालीन सत्र कुल 15 दिनों का है, जिसका अंतिम दिन 19 दिसंबर को होगा। इस सत्र के दौरान कई अहम विधेयक पहले ही पास किए जा चुके हैं, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा बाकी है। बुधवार को सदन में जी राम जी बिल पेश किया गया था, जिस पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई। इसके बाद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को इस बिल को लेकर सरकार का पक्ष रखा और विपक्ष के सवालों का जवाब दिया।
वायु प्रदूषण को लेकर संसद में हो रही चर्चा से यह साफ है कि यह समस्या अब सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह जन स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
सदन में उठी आवाज से लोगों को उम्मीद है कि सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त नीतियां बनाएगी और उनका प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन करेगी। दिल्ली की हवा को साफ करना अब केवल एक राज्य की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता बनता जा रहा है।

