28 Jul 2026, Tue

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘श्रीकांत’ का परचम, शरद केलकर बोले- अवॉर्ड्स के लिए नहीं बनाई थी फिल्म |

मुंबई: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में अभिनेता राजकुमार राव की फिल्म ‘श्रीकांत’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का सम्मान मिला है। इस उपलब्धि ने पूरी फिल्म टीम के लिए गर्व का पल बना दिया है। फिल्म में अहम भूमिका निभाने वाले अभिनेता शरद केलकर ने इस सम्मान पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह पुरस्कार सिर्फ एक फिल्म की जीत नहीं, बल्कि उन सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों की पहचान है जो समाज को सकारात्मक संदेश देती हैं।

फिल्म ‘श्रीकांत’ दृष्टिबाधित उद्योगपति श्रीकांत बोला के जीवन पर आधारित है। उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा, आत्मविश्वास और सफलता की कहानी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। अब राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद इस फिल्म को भारतीय सिनेमा की सबसे प्रेरणादायक फिल्मों में शामिल माना जा रहा है।

‘श्रीकांत’ सिर्फ फिल्म नहीं, प्रेरणा का प्रतीक

फिल्म में शरद केलकर ने बिजनेसमैन रवि मांथा की भूमिका निभाई है। रवि मांथा, श्रीकांत बोला के निवेशक, मार्गदर्शक और करीबी सहयोगी के रूप में उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शरद केलकर का कहना है कि यह किरदार उनके करियर के सबसे भावनात्मक अनुभवों में से एक रहा।

उन्होंने कहा कि ‘श्रीकांत’ किसी मसालेदार मनोरंजन पर आधारित फिल्म नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने सपनों को सच कर दिखाया। यही वजह है कि फिल्म दर्शकों के दिलों को छूने में सफल रही।

पुरस्कार नहीं, कहानी थी सबसे बड़ी प्राथमिकता

राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शरद केलकर ने कहा कि जब निर्देशक तुषार हिरानंदानी इस फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर आए थे, तब पूरी टीम का उद्देश्य पुरस्कार जीतना नहीं था। उनका मकसद केवल श्रीकांत बोला की वास्तविक कहानी को पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ बड़े पर्दे पर पेश करना था।

उन्होंने कहा, “कुछ फिल्में अभिनेता के रूप में खुद को साबित करने के लिए की जाती हैं, जबकि कुछ इसलिए कि वे हमें याद दिलाती हैं कि कहानियां क्यों सुनाई जानी चाहिए। ‘श्रीकांत’ ऐसी ही फिल्म है। यह राष्ट्रीय पुरस्कार उन सभी सच्ची कहानियों का सम्मान है जो लोगों को प्रेरित करती हैं।”

भरोसे और मानवीय मूल्यों की जीत

शरद केलकर ने कहा कि रवि मांथा का किरदार निभाते हुए उन्होंने विश्वास, सहयोग और सकारात्मक सोच की ताकत को बेहद करीब से महसूस किया। उनके मुताबिक, इस फिल्म की सफलता यह साबित करती है कि दर्शक आज भी ऐसी फिल्मों को पसंद करते हैं जिनमें भावनाएं, संघर्ष और वास्तविक जीवन की प्रेरणा मौजूद हो।

उन्होंने कहा कि ‘श्रीकांत’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना पूरी टीम की मेहनत और दर्शकों के प्यार का परिणाम है। यह सम्मान आने वाले समय में फिल्मकारों को भी ऐसी सार्थक कहानियां बनाने के लिए प्रेरित करेगा।

शानदार स्टारकास्ट और दमदार निर्देशन

तुषार हिरानंदानी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राजकुमार राव ने श्रीकांत बोला का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा। फिल्म में ज्योतिका, अलाया एफ और शरद केलकर ने भी अपनी बेहतरीन अदाकारी से कहानी को मजबूती दी।

फिल्म की एक बड़ी खासियत यह भी रही कि इसमें कई दृष्टिबाधित कलाकारों को अभिनय का अवसर दिया गया। इस पहल को समावेशिता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना गया और इसकी व्यापक सराहना हुई।

दर्शकों के दिलों तक पहुंची सच्ची कहानी

सिनेमाघरों में रिलीज के समय ‘श्रीकांत’ को दर्शकों और फिल्म समीक्षकों दोनों से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। अब राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद यह फिल्म एक बार फिर चर्चा में है। शरद केलकर का मानना है कि यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि ईमानदारी से बनाई गई और समाज को प्रेरित करने वाली कहानियां हमेशा लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लेती हैं। ‘श्रीकांत’ की यह सफलता भारतीय सिनेमा में प्रेरणादायक और मानवीय विषयों पर आधारित फिल्मों के बढ़ते महत्व को भी दर्शाती है।

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