29 Jul 2026, Wed

5% तक महंगी होंगी तेल, साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट जैसी रोजमर्रा की चीजें, हिंदुस्तान यूनिलीवर बढ़ाएगा कीमतें

देश की प्रमुख FMCG कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने संकेत दिया है कि सितंबर तिमाही में कई प्रॉडक्ट कैटेगरी में कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तिमाही की तुलना में चालू तिमाही में उत्पादों की कीमतों में 2 से 5 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। यदि ऐसा होता है तो डिटर्जेंट, चाय, कॉफी, साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट और अन्य दैनिक उपयोग के सामान महंगे हो सकते हैं।

कंपनी का कहना है कि बढ़ती इनपुट लागत, वैश्विक अनिश्चितताओं और महंगाई के दबाव को देखते हुए कीमतों में संतुलित और चरणबद्ध तरीके से बदलाव किया जाएगा। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता बिक्री की मात्रा (वॉल्यूम ग्रोथ) को बनाए रखना है।

HUL के प्रमुख ब्रांड्स पर पड़ सकता है असर

हिंदुस्तान यूनिलीवर भारत की सबसे बड़ी उपभोक्ता वस्तु कंपनियों में शामिल है। कंपनी डिटर्जेंट, चाय, कॉफी, फ्लोर क्लीनर, शैम्पू, टूथपेस्ट, फेस क्रीम, साबुन, जैम, सूप, हेल्थ ड्रिंक पाउडर और ब्यूटी प्रॉडक्ट्स जैसी अनेक श्रेणियों में कारोबार करती है।

कंपनी के प्रमुख ब्रांड्स में सर्फ एक्सेल, व्हील, रिन, विम, लाइफबॉय, लक्स, डव, पॉन्ड्स, वैसलीन, सनसिल्क, क्लिनिक प्लस, क्लोजअप, पेप्सोडेंट, रेड लेबल, ताज महल, ब्रू, हॉरलिक्स, बूस्ट, किसान जैम, नॉर सूप, लैक्मे और इंदूलेखा शामिल हैं। इन ब्रांड्स के उत्पाद देशभर के करोड़ों घरों में रोजाना इस्तेमाल किए जाते हैं।

पहली तिमाही में भी बढ़ी थीं कीमतें

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भी HUL ने कई उत्पाद श्रेणियों में 2 से 5 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ाई थीं। कंपनी की CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रिया नायर ने तिमाही नतीजों के बाद कहा कि कंपनी बाजार की परिस्थितियों और महंगाई के रुझान को देखते हुए मूल्य निर्धारण की रणनीति अपनाएगी।

उन्होंने कहा कि कंपनी कीमतें बढ़ाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं की मांग को बनाए रखने पर भी ध्यान दे रही है। उनका कहना था कि मूल्य वृद्धि का उद्देश्य केवल बढ़ती लागत की भरपाई करना है, न कि मांग पर नकारात्मक असर डालना।

महंगाई बढ़ने की आशंका

प्रिया नायर ने कहा कि कंपनी को सितंबर तिमाही में महंगाई के दबाव के और बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी तनाव, मानसून की स्थिति और अल नीनो जैसे मौसम संबंधी कारकों को भी संभावित जोखिम बताया।

उनके अनुसार वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर परिस्थितियां अभी भी अस्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में कच्चे माल, पैकेजिंग और परिवहन लागत में उतार-चढ़ाव का असर FMCG कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है।

ग्राहकों पर सीमित बोझ डालने की कोशिश

HUL के मुख्य वित्त अधिकारी निरंजन गुप्ता ने बताया कि जून तिमाही में कंपनी ने बढ़ती लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला था। उन्होंने कहा कि मूल्य निर्धारण के जरिए केवल लगभग आधी महंगाई की भरपाई की गई थी।

कंपनी का मानना है कि अत्यधिक कीमत बढ़ाने से उपभोक्ता मांग प्रभावित हो सकती है, इसलिए चरणबद्ध और संतुलित रणनीति अपनाई जा रही है।

यदि सितंबर तिमाही में प्रस्तावित मूल्य वृद्धि लागू होती है तो इसका असर देशभर के उपभोक्ताओं के मासिक घरेलू बजट पर पड़ सकता है। विशेष रूप से डिटर्जेंट, चाय, साबुन और व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का प्रभाव शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में महसूस किया जा सकता है।

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