रिलायंस समूह के चेयरमैन और उद्योगपति अनिल अंबानी को 420 करोड़ रुपये की कथित टैक्स चोरी के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) अधिनियम, 2015 के तहत उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद फिलहाल अनिल अंबानी के खिलाफ अभियोजन, जुर्माना या अन्य दंडात्मक कदम नहीं उठाए जा सकेंगे।
हाई कोर्ट ने स्वीकार की याचिका
मामले की सुनवाई जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने की। अदालत ने अनिल अंबानी द्वारा दायर उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने काला धन अधिनियम, 2015 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है।
याचिका में अंबानी ने दावा किया है कि अधिनियम के कुछ प्रावधान संविधान के अनुरूप नहीं हैं और उन्हें “अल्ट्रा वायर्स” यानी संविधान के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है। अदालत ने कहा कि इस कानून को चुनौती देने वाली कई अन्य याचिकाएं भी हाई कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए सभी संबंधित मामलों की अंतिम सुनवाई उचित समय पर की जाएगी।
केंद्र सरकार से मांगा जवाब
बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में अपना विस्तृत जवाब हलफनामे के रूप में दाखिल करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अनिल अंबानी के खिलाफ पहले ही आकलन आदेश (Assessment Order) पारित किया जा चुका है और उन्होंने इसके खिलाफ आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील भी दायर कर रखी है।
कोर्ट ने कहा कि अपील की प्रक्रिया जारी रह सकती है और संबंधित प्राधिकरण इस पर निर्णय भी ले सकते हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक इस रिट याचिका का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक अंबानी के खिलाफ अभियोजन या जुर्माने जैसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
आयकर विभाग ने 8 अगस्त 2022 को अनिल अंबानी को नोटिस जारी किया था। विभाग का आरोप है कि उन्होंने स्विट्जरलैंड के दो बैंक खातों में जमा 814 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी संपत्ति और आय की जानकारी भारतीय कर अधिकारियों से छिपाई।
विभाग के अनुसार इन खातों में कुल 814.27 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति थी, जिस पर लगभग 420.29 करोड़ रुपये का कर देय बनता है। आयकर विभाग का दावा है कि अंबानी ने विदेशी बैंक खातों और वित्तीय हितों की जानकारी जानबूझकर छिपाई और कर नियमों का उल्लंघन किया।
10 साल तक की सजा का प्रावधान
काला धन अधिनियम की धारा 50 और 51 के तहत दर्ज आरोपों में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। इसी आधार पर विभाग ने अंबानी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।
अनिल अंबानी की दलील
अपनी याचिका में अनिल अंबानी ने कहा है कि जिन वित्तीय लेनदेन और खातों को आधार बनाकर कार्रवाई की जा रही है, वे आकलन वर्ष 2006-07 और 2010-11 से जुड़े हैं। जबकि काला धन अधिनियम 2015 में लागू हुआ था। उनका तर्क है कि किसी कानून को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू कर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
अब इस मामले की आगे की सुनवाई हाई कोर्ट में होगी, जहां कानून की संवैधानिक वैधता और आयकर विभाग के आरोपों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

