वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश की चुनावी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए दावा किया है कि रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया और कुछ गैर-सरकारी संगठन अमेरिकी चुनाव प्रणाली को साइबर हमलों के माध्यम से प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ट्रंप ने अपनी सरकार द्वारा सार्वजनिक किए गए अवर्गीकृत खुफिया दस्तावेजों का हवाला देते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों, मतदाता डेटाबेस और मतगणना प्रणालियों की सुरक्षा में तत्काल सुधार की मांग की है।
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि चुनावी ढांचे से संबंधित जारी किए गए दस्तावेजों के तीसरे सेट में कई गंभीर जानकारियां सामने आई हैं। उनके अनुसार, अमेरिकी प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को लंबे समय से चुनावी व्यवस्था में मौजूद तकनीकी कमजोरियों की जानकारी थी, लेकिन इन खतरों के बारे में जनता को पूरी तरह नहीं बताया गया।
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम पर उठाए सवाल
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें, मतगणना उपकरण और मतदाता पंजीकरण डेटाबेस साइबर हमलों के प्रति पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी सरकारें या तकनीकी रूप से सक्षम संगठन इन प्रणालियों में सेंध लगाकर मतदाताओं से संबंधित जानकारी चुरा सकते हैं या चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर सकते हैं।
उन्होंने चुनाव अधिकारियों से पेपर बैलेट, सुरक्षित मतदाता पहचान प्रणाली, स्वतंत्र साइबर ऑडिट और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की नियमित जांच जैसे कदम उठाने की मांग की। ट्रंप के अनुसार, चुनावों में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए प्रत्येक वोट का सत्यापन और पारदर्शी मतगणना बेहद जरूरी है।
चीन से जुड़े मामले की जांच का आदेश
ट्रंप ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान चीन से जुड़ी कथित गतिविधियों को कुछ अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने संबंधित खुफिया सूचनाओं और अधिकारियों की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं। ट्रंप का कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि संभावित विदेशी हस्तक्षेप से संबंधित जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
हालांकि, चीन पहले भी अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज कर चुका है। अमेरिकी एजेंसियों की पूर्व रिपोर्टों में भी यह कहा गया था कि किसी विदेशी सरकार द्वारा मतदाता पंजीकरण, मतपत्रों, मतगणना या आधिकारिक चुनाव परिणामों में प्रत्यक्ष बदलाव करने के ठोस प्रमाण नहीं मिले थे।
वेनेजुएला पर भी लगाया आरोप
ट्रंप ने वेनेजुएला से जुड़े कुछ समूहों पर भी वर्ष 2020 के चुनाव परिणामों में डिजिटल हेरफेर की कथित साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने अपने संबोधन में इन आरोपों से संबंधित सभी तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किए।
ट्रंप के ताजा बयान के बाद अमेरिका में चुनावी साइबर सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं और चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आरोप की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, चुनावी व्यवस्था की सुरक्षा मजबूत करना आवश्यक है, लेकिन बिना प्रमाण के दावे मतदाताओं के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं।
कीवर्ड: Donald Trump, US Election Security, Election Hacking, Cyber Threats, Electronic Voting System, China Election Interference

