5 May 2026, Tue

28 फरवरी से अब तक 65% महंगा हो चुका है कच्चा तेल, जानें कहां से कहां पहुंचा भाव

ईरान-यूएस तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर देखने को मिला है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने अपने नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया, जिसके बाद दुनिया भर में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई प्रभावित हो गई। इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।

65% से ज्यादा बढ़े कच्चे तेल के दाम

ऊर्जा बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब 65 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई है। केडिया एडवायजरी के फाउंडर और डायरेक्टर अजय केडिया ने बताया कि 28 फरवरी के बाद से अब तक तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक:

  • 28 फरवरी को कच्चा तेल: लगभग 6,092 रुपये प्रति बैरल
  • 4 मई को कीमत बढ़कर: लगभग 10,057 रुपये प्रति बैरल

इस तरह कुछ ही हफ्तों में तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है।

मिडिल ईस्ट में तनाव से बढ़ी स्थिति

जानकारी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने इस साल 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। इस हमले में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को नुकसान पहुंचने की भी खबरें सामने आईं, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी।

ईरान ने इजरायल के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। इन घटनाओं के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में हालात और तनावपूर्ण हो गए।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है अहम?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर सीधा असर पड़ता है।

ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद करने के बाद दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो गई, जिससे कीमतों में तेजी आई।

अन्य धातुओं की कीमतों में भी उछाल

इस भू-राजनीतिक संकट का असर केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धातुओं के बाजार पर भी पड़ा है।

  • एल्युमिनियम की कीमतें: 312.80 रुपये से बढ़कर 371 रुपये प्रति किलो (18.61% वृद्धि)
  • कॉपर की कीमतें: 1222.35 रुपये से बढ़कर 1276.75 रुपये प्रति किलो (4.45% वृद्धि)
  • जिंक की कीमतें: 326.55 रुपये से बढ़कर 342.25 रुपये प्रति किलो (4.81% वृद्धि)

वैश्विक बाजार पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर आम जनता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव कम होगा या हालात और बिगड़ेंगे।

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