पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब डेढ़ प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और दोनों प्रमुख बेंचमार्क तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के बेहद करीब पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 95 डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां बढ़ने और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा होने से कीमतों पर दबाव बढ़ा है। निवेशकों की नजर अब क्षेत्र में आगे होने वाली गतिविधियों और वैश्विक सप्लाई पर पड़ने वाले संभावित असर पर बनी हुई है।
ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर के पार
बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1.50 प्रतिशत की तेजी के साथ 99.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं, WTI क्रूड भी लगभग 1.50 प्रतिशत चढ़कर 94.21 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तेज बढ़त के पीछे सबसे बड़ी वजह सप्लाई बाधित होने की आशंका है। पश्चिम एशिया दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है और यहां किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
ईरान से जुड़े घटनाक्रम ने बढ़ाई चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ऐसे समय में आई है, जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में ईरान के तेल निर्यात से जुड़े ठिकानों और टैंकरों को निशाना बनाए जाने की खबरों के बाद बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
इसके जवाब में ईरान की ओर से भी सैन्य कार्रवाई की गई है। ईरान ने जॉर्डन की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया है। इसके अलावा कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के आसपास मौजूद जहाजों को लेकर भी चेतावनी दी गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजर
वैश्विक तेल बाजार के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की रुकावट से कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई प्रभावित हो सकती है। मौजूदा तनाव के बीच कई रिफाइनरियां वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा तेल हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।
चीन में तेल की मांग बढ़ने के कारण अफ्रीकी, कनाडाई और लैटिन अमेरिकी कच्चे तेल की मांग भी बढ़ रही है। इससे वैकल्पिक सप्लाई के लिए प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत मांग और सप्लाई से जुड़े जोखिम मिलकर तेल की कीमतों को और ऊपर ले जा सकते हैं।
भारतीय बाजार पर भी दिखा असर
पश्चिम एशिया में तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी दिन बाजार में गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 361.36 अंक यानी 0.48 प्रतिशत गिरकर 75,216.22 अंक पर खुला। वहीं निफ्टी 50 करीब 113.05 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,522.05 अंक पर खुला।
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए भी चिंता बढ़ा सकती है। आने वाले दिनों में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर टिकता है, तो इसका असर आयात लागत, महंगाई और व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

