नई दिल्ली: देश की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही मुश्किल भरी रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दामों में बदलाव नहीं होने से कंपनियों का रिटेल मार्जिन नकारात्मक हो गया है।
ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तेल कंपनियों को रिटेल में बेचे गए प्रत्येक लीटर डीजल पर करीब 18.9 रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, पेट्रोल की बिक्री पर कंपनियों को लगभग छह रुपये प्रति लीटर का घाटा उठाना पड़ा।
इन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।
पिछले साल पेट्रोल-डीजल पर हुई थी अच्छी कमाई
रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल पहले स्थिति बिल्कुल अलग थी। उस समय तेल कंपनियों ने एक लीटर डीजल की बिक्री पर करीब 8.2 रुपये और पेट्रोल पर 10.3 रुपये प्रति लीटर का रिटेल मार्जिन कमाया था।
जून 2024 की तिमाही में भी कंपनियों का रिटेल मार्जिन सकारात्मक था। उस दौरान डीजल पर करीब 2.5 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर 4.4 रुपये प्रति लीटर की कमाई हुई थी। हालांकि, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी का असर घरेलू खुदरा कीमतों पर नहीं डाला गया, जिससे कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ा।
कंपनियों को करीब 75 हजार करोड़ रुपये का नुकसान
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, जून तिमाही में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और विमान ईंधन को बाजार दरों से कम कीमत पर बेचने के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को करीब 75 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
दरअसल, रिफाइनरी गेट पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों के आधार पर तय होती हैं। इसके बाद परिवहन, मार्केटिंग, वितरण लागत, डीलर कमीशन और रिटेल मार्जिन को जोड़कर पेट्रोल पंप पर बिक्री की कीमत निर्धारित की जाती है।
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन घरेलू पंप की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो तेल कंपनियों का रिटेल मार्जिन कम या नकारात्मक हो जाता है। वहीं, वैश्विक कीमतें गिरने और घरेलू कीमतों में कटौती नहीं होने पर कंपनियों का मार्जिन बढ़ जाता है।
पेट्रोल पर 12 रुपये तक पहुंचा था मार्जिन
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक, पिछले दो वित्तीय वर्षों में पेट्रोल का रिटेल मार्जिन वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में करीब 12 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था। इससे पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव का तेल कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ता है।
वर्ष 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में नियमित बदलाव करना लगभग बंद कर दिया।
पिछले चार वर्षों में घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बहुत कम बदलाव हुआ है। इसके कारण वैश्विक कीमतें गिरने पर कंपनियों ने अच्छा मार्जिन कमाया, लेकिन कीमतें बढ़ने पर उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। आने वाली तिमाहियों में तेल कंपनियों का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू ईंधन मूल्य नीति पर निर्भर करेगा।

