अमेरिका में एक हिंदू मंदिर पर गोलीबारी की कोशिश का मामला सामने आने के बाद धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ कथित नफरत को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस मामले में 100 से अधिक अमेरिकी सांसदों ने संघीय जांच एजेंसी के निदेशक को पत्र लिखकर घटना की जांच नफरत से प्रेरित अपराध यानी फेडरल हेट क्राइम के तौर पर करने की मांग की है। सांसदों ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय को निशाना बनाने वाली ऑनलाइन धमकियों और धार्मिक पूर्वाग्रह से जुड़ी घटनाओं पर भी सवाल उठाए हैं।
20 अक्टूबर को लिखे गए इस पत्र पर कांग्रेस के 105 सदस्यों के हस्ताक्षर बताए गए हैं, जिनमें चार सीनेटर भी शामिल हैं। सांसदों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संभावित नस्लीय, जातीय और धार्मिक पूर्वाग्रह की भी गहन जांच की जानी चाहिए।
शिकागो के पास हिंदू मंदिर में हमले की कोशिश
यह मामला इलिनोइस राज्य के ऑरोरा शहर में स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंदिर में गोलीबारी करने की कथित कोशिश के आरोप में 19 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया गया था।
बताया गया कि आरोपी के पास मौजूद शॉटगन में खराबी आने के कारण उसकी योजना सफल नहीं हो सकी। इससे संभावित रूप से बड़ी घटना टल गई। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई और आरोपी के उद्देश्य को लेकर जांच शुरू हुई।
अब सांसद चाहते हैं कि जांच में यह भी पता लगाया जाए कि घटना के पीछे किसी व्यक्ति या समुदाय के प्रति धार्मिक अथवा नस्लीय नफरत की भूमिका थी या नहीं। हालांकि, मामले में नफरत से प्रेरित अपराध होने की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।
ऑनलाइन धमकियों और सरकारी संदेशों पर भी सवाल
सांसदों ने अपने पत्र में भारतीय-अमेरिकी और अन्य दक्षिण एशियाई समुदायों को निशाना बनाने वाली ऑनलाइन गतिविधियों पर चिंता जताई है। उन्होंने कुछ सरकारी विभागों की सोशल मीडिया पोस्ट का भी उल्लेख किया, जिन्हें उनके अनुसार नस्लीय और धार्मिक रूढ़ियों को बढ़ावा देने वाला माना जा सकता है।
पत्र में गृह सुरक्षा विभाग की एक पोस्ट का हवाला दिया गया, जिसमें एक सिख व्यक्ति की तस्वीर के साथ अपमानजनक संदेश साझा किया गया था। इसके अलावा, शिक्षा विभाग की एक पोस्ट का भी उल्लेख किया गया, जो विश्वविद्यालय स्तर के फुटबॉल मुकाबलों में दक्षिण एशियाई लोगों की भागीदारी को लेकर उठे विवाद के बाद सामने आई थी।
सांसदों का आरोप है कि इस तरह के संदेश संबंधित समुदायों के प्रति नकारात्मक धारणाओं को बढ़ा सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने और समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
FBI से पूछे गए कई अहम सवाल
पत्र में जांच एजेंसी से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि क्या मंदिर में हमले की कथित कोशिश की जांच के दौरान संभावित नस्लीय, जातीय और धार्मिक पूर्वाग्रहों को ध्यान में रखा जा रहा है।
सांसद यह भी जानना चाहते हैं कि क्या किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या अन्य व्यक्तियों ने कथित हमले की योजना को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई थी। इसके साथ ही उन्होंने पूजा स्थलों की सुरक्षा बढ़ाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
इस घटना ने अमेरिका में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और अल्पसंख्यक समुदायों के संरक्षण को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। सांसदों का मानना है कि नस्लीय नफरत, धार्मिक पूर्वाग्रह और हिंसा की संभावित योजनाओं से जुड़े मामलों में प्रभावी संघीय कार्रवाई जरूरी है।
फिलहाल, इस मामले में जांच के अंतिम निष्कर्ष और सांसदों की मांग पर संबंधित एजेंसी की प्रतिक्रिया का इंतजार है। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित हमले के पीछे क्या उद्देश्य था और क्या इसे नफरत से प्रेरित अपराध के रूप में देखा जाना चाहिए।

