यरुशलम: इजरायल ने हमास के साथ प्रस्तावित निरस्त्रीकरण (डिसआर्मामेंट) समझौते को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया है। इजरायली सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हमास अपने सभी हथियार पूरी तरह सरेंडर नहीं कर देता, तब तक इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। इजरायल ने इस मुद्दे पर अमेरिका के सामने अपनी “गंभीर सुरक्षा चिंताएं” भी रखी हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में गाजा को लेकर संभावित समझौते का संकेत दिया था। ट्रंप के बयान के बाद इजरायल की ओर से यह पहला सार्वजनिक और स्पष्ट रुख माना जा रहा है।
हमास के इरादों पर इजरायल को संदेह
इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन ने कहा कि देश की खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि हमास वास्तव में निरस्त्रीकरण नहीं चाहता। उनका दावा है कि हमास किसी भी संभावित युद्धविराम या समझौते का उपयोग अपनी सैन्य क्षमता को दोबारा मजबूत करने के लिए कर सकता है।
स्पीलमैन के अनुसार, यदि इजरायली सेना समय से पहले गाजा से हटती है, तो हमास तेजी से पूरे गाजा में अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है, अपने सुरंग नेटवर्क और सैन्य ढांचे को फिर से खड़ा कर सकता है और भविष्य में इजरायल के खिलाफ बड़े हमले की तैयारी कर सकता है।
‘7 अक्टूबर जैसी घटना दोबारा नहीं होने देंगे’
इजरायली सरकार का कहना है कि 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमले जैसी स्थिति दोबारा नहीं बनने दी जाएगी। स्पीलमैन ने कहा कि यदि हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण से पहले सेना हटाई गई, तो यह इजरायल की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होगा।
उन्होंने कहा, “हमारा आकलन है कि हमास अपनी सैन्य मौजूदगी फिर से स्थापित करेगा और इजरायली समुदायों के लिए दोबारा खतरा बन सकता है। इसलिए हमारी प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा है।”
पूर्ण हथियार समर्पण ही स्वीकार्य
डोरोन स्पीलमैन ने दो टूक शब्दों में कहा कि इजरायल के लिए निरस्त्रीकरण का अर्थ केवल हथियारों का पूर्ण समर्पण है। उन्होंने कहा कि इससे कम किसी भी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह बयान हमास द्वारा हाल ही में दिए गए उस संकेत के बाद आया है, जिसमें संगठन ने अमेरिका की मध्यस्थता वाली युद्धविराम प्रक्रिया के तहत निरस्त्रीकरण की दिशा में कदम बढ़ाने की बात कही थी। हालांकि इजरायल का मानना है कि केवल वादों के आधार पर सुरक्षा जोखिम नहीं उठाया जा सकता।
ट्रंप की 20 सूत्री गाजा योजना
गाजा में युद्ध समाप्त करने के लिए प्रस्तावित अमेरिकी योजना में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। इसमें हमास का निरस्त्रीकरण, उसके सुरंग नेटवर्क को नष्ट करना, इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी, तकनीकी विशेषज्ञों वाली नई फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था का गठन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती और गाजा के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव शामिल है।
हालांकि इन प्रस्तावों को संघर्ष समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, लेकिन इजरायल की सुरक्षा चिंताओं के कारण समझौते का रास्ता अभी भी आसान नहीं दिख रहा।
आगे क्या?
वर्तमान में गाजा के 60 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर इजरायली सेना का नियंत्रण बताया जा रहा है। ऐसे में किसी भी युद्धविराम या शांति समझौते की सफलता काफी हद तक हमास के निरस्त्रीकरण और सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर करेगी। आने वाले दिनों में अमेरिका, इजरायल और अन्य मध्यस्थ देशों के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे मुद्दे की दिशा तय कर सकती है।

