राजकुमार राव की चर्चित फिल्म ‘शाहिद’ ने सिनेमाघरों में रिलीज होने के करीब 13 साल बाद आखिरकार ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दस्तक दे दी है। साल 2013 में रिलीज हुई इस फिल्म को अब प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम किया जा रहा है। फिल्म की डिजिटल रिलीज में हुई लंबी देरी ने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा है। फिल्म के लेखक और एडिटर अपूर्व अस्रानी ने भी इसके ओटीटी पर आने के बाद सवाल उठाया कि आखिर इतने वर्षों बाद इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर क्यों रिलीज किया गया।
शाहिद आजमी की जिंदगी से प्रेरित है कहानी
हंसल मेहता के निर्देशन में बनी ‘शाहिद’ वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहिद आजमी की जिंदगी से प्रेरित फिल्म है। इसमें राजकुमार राव ने मुख्य भूमिका निभाई थी। कहानी एक ऐसे वकील के इर्द-गिर्द घूमती है, जो आतंकवाद से जुड़े मामलों में आरोपी बनाए गए लोगों को कानूनी सहायता देने और उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया का अधिकार दिलाने के लिए काम करता है।
फिल्म में शाहिद आजमी के संघर्ष, उनके पेशे और सामाजिक परिस्थितियों को दिखाया गया है। असली शाहिद आजमी की साल 2010 में मुंबई में हत्या कर दी गई थी। फिल्म का प्रीमियर 2012 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जबकि भारत में इसे 2013 में सिनेमाघरों में रिलीज किया गया।
राष्ट्रीय पुरस्कारों में मिली थी पहचान
कम बजट में बनी इस फिल्म को कहानी और कलाकारों के प्रदर्शन के लिए काफी सराहना मिली थी। फिल्म की रिलीज के बाद राजकुमार राव को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और हंसल मेहता को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। इसके बावजूद फिल्म लंबे समय तक किसी बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं थी।
ओटीटी के दौर में भी फिल्म के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं होने को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे। निर्देशक हंसल मेहता भी पहले इस बात पर सार्वजनिक रूप से निराशा जता चुके हैं कि फिल्म लंबे समय तक ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें फिल्म के डिजिटल अधिकारों की स्थिति की स्पष्ट जानकारी नहीं थी।
लेखक अपूर्व अस्रानी ने पूछा- अब क्यों?
फिल्म के ओटीटी पर आने के बाद इसके लेखक और एडिटर अपूर्व अस्रानी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने फिल्म की डिजिटल रिलीज में हुई देरी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर ‘शाहिद’ को अब क्यों स्ट्रीम किया जा रहा है।
अस्रानी ने फिल्म के विषय और उसकी कहानी का जिक्र करते हुए कहा कि यह फिल्म कानूनी प्रक्रिया और आरोपियों के अधिकारों जैसे मुद्दों पर बात करती है। उन्होंने शाहिद आजमी के काम और उनके संघर्ष को याद किया। उनके मुताबिक, आजमी ने उन लोगों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी, जिन्हें वह उचित कानूनी प्रक्रिया का अधिकार दिलाना चाहते थे।
मौजूदा सामाजिक माहौल का भी किया जिक्र
अपूर्व अस्रानी ने अपनी प्रतिक्रिया में 2014 के बाद के सामाजिक और राजनीतिक माहौल का भी उल्लेख किया। उन्होंने असहमति जताने वाले लोगों, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और आरोपियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने उमर खालिद के मामले का भी उल्लेख करते हुए अपनी राय रखी।
हालांकि, फिल्म की ओटीटी रिलीज में देरी के आधिकारिक कारण के तौर पर अस्रानी की सोशल मीडिया पोस्ट में कही गई बातें स्थापित तथ्य नहीं हैं। फिल्म अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने के बाद उन दर्शकों तक पहुंच रही है, जो रिलीज के समय इसे सिनेमाघरों में नहीं देख पाए थे।

