स्मार्टफोन बन रहा ‘साइलेंट स्ट्रेसर’: ज्यादा इस्तेमाल से बढ़ रहा लाइफस्टाइल बीमारियों का खतरा
नई दिल्ली: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल अब गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्मार्टफोन केवल आंखों की थकान ही नहीं बढ़ा रहा, बल्कि शरीर के अंदरूनी सिस्टम—जैसे दिमाग, नींद और पाचन तंत्र—पर भी गहरा असर डाल रहा है।
हालिया आंकड़े बताते हैं कि भारत में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के मामले जहां पहले 16-17% थे, वे अब 25% से ऊपर पहुंच गए हैं। वहीं डायबिटीज, थायराइड और मोटापे जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। इसके पीछे एक बड़ा कारण बदलती जीवनशैली और बढ़ता स्क्रीन टाइम माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में भारतीयों ने कुल मिलाकर 1.1 ट्रिलियन घंटे स्क्रीन पर बिताए। औसतन हर व्यक्ति रोज करीब 5 घंटे फोन इस्तेमाल कर रहा है, जिसमें से लगभग 70% समय सोशल मीडिया, गेमिंग और शॉर्ट वीडियो देखने में जाता है। यही आदतें धीरे-धीरे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं।
सबसे बड़ा असर नींद पर पड़ता है। स्मार्टफोन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को रोक देती है, जिससे नींद का चक्र बिगड़ जाता है। देर रात तक फोन चलाने से गहरी और संतुलित नींद नहीं मिल पाती, जिसका असर पूरे दिन की ऊर्जा और मानसिक स्थिति पर पड़ता है।
दिमाग पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलता है। बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया पर मिलने वाले ‘लाइक्स’ दिमाग में डोपामाइन रिलीज करते हैं। यह धीरे-धीरे एक लत का रूप ले लेता है, जिससे एकाग्रता में कमी, बेचैनी और मानसिक तनाव बढ़ता है। लंबे समय तक ऐसा रहने से व्यक्ति की सोचने और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
हैरानी की बात यह है कि स्मार्टफोन का असर पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। खाने के दौरान फोन इस्तेमाल करने से लोग भोजन पर ध्यान नहीं दे पाते, जिससे अधिक खाना या ठीक से न चबाना जैसी आदतें विकसित हो जाती हैं। इससे अपच, गैस और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। साथ ही तनाव और एंग्जायटी का असर सीधे गट माइक्रोबायोम पर पड़ता है, जिससे पाचन तंत्र और कमजोर हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। छोटे-छोटे बदलाव जैसे सोने से पहले फोन का इस्तेमाल कम करना, खाने के दौरान स्क्रीन से दूरी बनाना और दिन में कुछ समय डिजिटल डिटॉक्स करना, स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।
कुल मिलाकर, स्मार्टफोन एक उपयोगी उपकरण है, लेकिन इसका अति-उपयोग शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। ऐसे में संतुलित उपयोग ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।

