25 Apr 2026, Sat

शीश महल-2 पर सियासी संग्राम, बीजेपी ने केजरीवाल पर निजी खर्च के लगाए आरोप, AAP ने किया पलटवार

अरविंद केजरीवाल के लोधी एस्टेट बंगले को लेकर विवाद, बीजेपी और ‘आप’ में तीखी बयानबाजी

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की राजनीति एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप के नए विवाद में उलझती नजर आ रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर लोधी एस्टेट स्थित उनके नए सरकारी आवास को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी ने इस बंगले को ‘शीशमहल-2’ करार देते हुए दावा किया है कि इसमें निजी खर्च से अत्यधिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।

दिल्ली के लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने बीजेपी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके आवास में असाधारण स्तर की लग्जरी सुविधाएं मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के मानकों से परे जाकर बंगले में उच्च स्तरीय इंटीरियर और सुविधाओं पर कथित रूप से निजी धन खर्च किया गया है। वर्मा ने सवाल उठाया कि इस खर्च का स्रोत क्या है और इसके लिए किसने भुगतान किया।

बीजेपी नेता ने यह भी दावा किया कि लोधी एस्टेट स्थित टाइप-7 बंगला, जहां केजरीवाल वर्तमान में रह रहे हैं, पांच शयनकक्षों और चार बैठक कक्षों वाला एक अत्यधिक सुविधाजनक आवास है। उन्होंने इसे लुटियंस दिल्ली के अन्य बंगलों से भी अधिक भव्य बताया और आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी पारदर्शिता के मुद्दे पर सवालों के घेरे में है।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने कहा कि बीजेपी द्वारा जारी की गई तस्वीरें और दावे पूरी तरह फर्जी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए गलत जानकारी फैलाई जा रही है और जनता को भ्रमित किया जा रहा है।

आतिशी ने यह भी सुझाव दिया कि पारदर्शिता साबित करने के लिए सभी संबंधित नेताओं को अपने-अपने सरकारी आवास जनता के सामने खोल देने चाहिए, ताकि लोग स्वयं तुलना कर सकें। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और इनका उद्देश्य केवल छवि खराब करना है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी बीजेपी ने सिविल लाइंस स्थित 6, फ्लैगस्टाफ रोड बंगले को ‘शीशमहल’ नाम दिया था, जहां केजरीवाल मुख्यमंत्री के रूप में सितंबर 2024 तक रहे थे। उस समय भी बंगले के पुनर्निर्माण और उसमें किए गए कथित भारी खर्च को लेकर विवाद हुआ था।

इस नए विवाद ने दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर गर्मी ला दी है, जहां दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, अब तक किसी भी आरोप की स्वतंत्र जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मुद्दे आने वाले समय में दिल्ली की राजनीति को और अधिक प्रभावित कर सकते हैं, खासकर तब जब विभिन्न दल पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक-दूसरे को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *