14 Jun 2026, Sun

रियल लाइफ में कौन हैं Bharat Bhhagya Viddhaata की नर्स? आतंकियों की बंदूकों के आगे बनीं ढाल, बचाई थी 20 प्रेग्नेंट महिलाओं की जान

मुंबई: बॉलीवुड अभिनेत्री Kangana Ranaut की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह फिल्म 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर आधारित है और उस अनसुने साहस की कहानी को सामने लाती है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। फिल्म में कंगना रनौत ने नर्स अंजलि कुल्थे का किरदार निभाया है, जिन्होंने 26/11 हमलों के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों की जिंदगी बचाई थी।

26/11 मुंबई हमले को देश के इतिहास की सबसे भयावह आतंकी घटनाओं में गिना जाता है। जब आतंकियों ने मुंबई के कई प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया, तब शहर में दहशत का माहौल था। इस दौरान Cama and Albless Hospital में भी खतरा मंडरा रहा था। वहीं ड्यूटी पर मौजूद थीं नर्स अंजलि कुल्थे, जिनकी बहादुरी आज भी प्रेरणा का स्रोत मानी जाती है।

उस रात अंजलि कुल्थे अपनी नियमित नाइट शिफ्ट पर थीं। अस्पताल के वार्ड में लगभग 20 गर्भवती महिलाएं भर्ती थीं, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। तभी अस्पताल परिसर में आतंकियों के घुसने और गोलीबारी की खबर मिली। चारों ओर अफरा-तफरी और डर का माहौल था, लेकिन अंजलि ने घबराने के बजाय मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।

उन्होंने तुरंत वार्ड के दरवाजे बंद किए और सभी महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की। इसी दौरान एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे क्योंकि अस्पताल के गलियारों में खतरा मंडरा रहा था और लेबर रूम तक पहुंचना आसान नहीं था। इसके बावजूद अंजलि ने साहस दिखाया और महिला को सुरक्षित तरीके से ऊपर ले जाकर उसकी डिलीवरी सुनिश्चित करवाई। इस दौरान एक स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ, जिसे उस रात उम्मीद और जीवन की जीत का प्रतीक माना गया।

अंजलि कुल्थे ने बाद में बताया था कि उस कठिन समय में उन्होंने अपने डर को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उनका मानना था कि नर्स की वर्दी केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सेवा का प्रतीक है। उन्होंने अपने मरीजों को सुरक्षित रखने को ही अपना सबसे बड़ा कर्तव्य माना।

फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ इसी वास्तविक घटना और अंजलि कुल्थे के साहसिक जीवन पर आधारित है। फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि देश के इतिहास के बड़े संकटों में केवल सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि आम नागरिक भी असाधारण साहस का परिचय देते हैं।

फिल्म के निर्माताओं का मानना है कि अंजलि कुल्थे जैसी अनसुनी नायिकाओं की कहानियां नई पीढ़ी तक पहुंचना जरूरी है। कंगना रनौत ने भी अपने किरदार को लेकर कहा है कि यह भूमिका उनके करियर की सबसे भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक रही।

‘भारत भाग्य विधाता’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उन गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने संकट की घड़ी में अपने कर्तव्य को सबसे ऊपर रखा। अंजलि कुल्थे की कहानी आज भी यह संदेश देती है कि सच्ची बहादुरी हथियारों से नहीं, बल्कि इंसानियत और जिम्मेदारी से पैदा होती है।

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