27 Apr 2026, Mon

राधा रानी के भक्त बने पारस छाबड़ा, नाक से माथे तक लगाते हैं चंदन, बताया अनोखे तिलक का राज, सुनाई ‘बिहारिन दास’ की कथा

बिग बॉस 13 फेम पारस छाबड़ा ने अपनाई आध्यात्मिक राह, बताया क्यों लगाते हैं अनोखा तिलक

टीवी एक्टर और बिग बॉस 13 फेम पारस छाबड़ा इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा अपनी आध्यात्मिक यात्रा को लेकर सुर्खियों में हैं। एक समय रियलिटी शो में अपने विवादों और दोस्ती-झगड़ों के कारण चर्चा में रहने वाले पारस अब पूरी तरह भक्ति और आध्यात्म की राह पर चल पड़े हैं।

पारस छाबड़ा ने हाल ही में अपने पॉडकास्ट “आबरा का डाबरा” में खुलकर अपनी आध्यात्मिक सोच और जीवन में आए बदलाव के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि कैसे प्रेमानंद महाराज की शरण में आने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया और वह अब भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन रहते हैं।

आध्यात्म की ओर बदली लाइफस्टाइल

पारस छाबड़ा अब यूट्यूब पर भी सक्रिय हैं और अपने पॉडकास्ट के जरिए भक्ति, धर्म और आध्यात्म से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हैं। वह अक्सर अपने अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि कैसे आध्यात्म ने उन्हें मानसिक शांति और नया दृष्टिकोण दिया है।

उन्होंने यह भी बताया कि गुरु दीक्षा लेने के बाद से उनकी जीवनशैली पूरी तरह बदल गई है। अब वह गले में तुलसी की माला पहनते हैं और माथे पर चंदन का तिलक लगाते हैं, जिसे वह अपनी आस्था का प्रतीक मानते हैं।

क्यों लगाते हैं पारस छाबड़ा नाक तक तिलक?

अपने हालिया पॉडकास्ट में पारस ने अपने खास तिलक के पीछे की कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया कि उनका तिलक सिर्फ धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक कथा से जुड़ा हुआ है।

पारस के अनुसार, मुगल शासक अकबर के समय एक संत बिहारिन दास, जो श्री हरिदास के शिष्य थे, राधा रानी के परम भक्त थे। अकबर के दरबार में धार्मिक चिन्हों पर प्रतिबंध था, लेकिन बिहारिन दास अपने माथे पर चंदन का तिलक लगाते थे क्योंकि यह उनके आराध्य का प्रतीक था।

राधा रानी से जुड़ी मान्यता

कहानी के अनुसार, जब बिहारिन दास संकट में थे, तब उन्हें राधा रानी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। कहा जाता है कि राधा रानी ने स्वयं उनके माथे पर लगा तिलक नाक तक विस्तारित कर दिया और उन्हें सुरक्षा का आशीर्वाद दिया।

इसके बाद जब बिहारिन दास अकबर के दरबार में पहुंचे, तो उन्होंने अपने तिलक की दिव्यता और आस्था के बारे में बताया। यह सुनकर अकबर भी प्रभावित हुए और उन्हें छोड़ दिया गया। इस घटना को भक्तों के बीच आस्था और चमत्कार का प्रतीक माना जाता है।

पारस छाबड़ा की आस्था

पारस छाबड़ा का कहना है कि उनका तिलक इसी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यता का प्रतीक है। वह इसे राधा रानी की कृपा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक मानते हैं।

पिछले कुछ समय से पारस हर सार्वजनिक कार्यक्रम, पॉडकास्ट और इवेंट में इसी तिलक के साथ नजर आते हैं, जिससे उनकी नई पहचान एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व के रूप में बनती जा रही है।

निष्कर्ष

पारस छाबड़ा का यह आध्यात्मिक बदलाव उनके फैंस के लिए भी चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर वह टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुके हैं, वहीं अब वह भक्ति और आध्यात्म की राह पर चलते हुए एक नई जीवनशैली को अपनाते नजर आ रहे हैं।

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