उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता हुई एमबीए छात्रा बबीता पांडे की तलाश 13वें दिन भी जारी है। लगातार कई दिनों से चल रहे व्यापक सर्च ऑपरेशन के बावजूद अब तक बबीता का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। मामले ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे राज्य को चिंता में डाल दिया है। पुलिस, आपदा राहत एजेंसियों और पर्वतारोहण विशेषज्ञों की संयुक्त टीमें कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच लगातार खोज अभियान चला रही हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार बबीता पांडे के मोबाइल फोन की अंतिम सक्रिय लोकेशन दयारा बुग्याल ट्रेक के गोई कैंप क्षेत्र से लगभग 200 मीटर नीचे दर्ज की गई थी। इसी लोकेशन को केंद्र में रखकर सर्च ऑपरेशन को और तेज कर दिया गया है। हालांकि मोबाइल की अंतिम लोकेशन मिलने के बाद भी अब तक कोई ऐसा सुराग नहीं मिला है जिससे बबीता की स्थिति का पता चल सके।
लास्ट लोकेशन के आसपास बढ़ाई गई निगरानी
प्रशासन ने बबीता की तलाश के लिए कई एजेंसियों को एक साथ लगाया है। सर्च ऑपरेशन में लगभग 120 लोगों की टीम शामिल है, जिसमें National Disaster Response Force (NDRF), State Disaster Response Force (SDRF), Indo-Tibetan Border Police (ITBP), नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) के प्रशिक्षित पर्वतारोही, उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और स्थानीय ग्रामीण शामिल हैं।
खोज अभियान के दौरान आसपास के जंगलों, पहाड़ी ढलानों, नदी-नालों और तालाबों की गहन तलाशी ली जा रही है। दयारा बुग्याल का क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां खोज अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।
पुलिस जांच भी जारी
सर्च ऑपरेशन के साथ-साथ पुलिस ने मामले की औपचारिक जांच भी शुरू कर दी है। Uttarakhand Police ने कोतवाली मनेरी में मामला दर्ज कर बबीता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन हिस्ट्री और डिजिटल गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है।
जांच एजेंसियां बबीता के संपर्क में रहने वाले लोगों से भी पूछताछ कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनके लापता होने से पहले किसी संदिग्ध गतिविधि या परिस्थिति के संकेत मिले थे या नहीं।
सामने आई आखिरी तस्वीर
इस बीच बबीता पांडे की एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसे उनकी आखिरी तस्वीर बताया जा रहा है। यह तस्वीर 29 तारीख को उस कैंप के पास ली गई थी जहां वह ट्रेकिंग के दौरान ठहरी हुई थीं। तस्वीर में बबीता दयारा बुग्याल की खूबसूरत वादियों को निहारती हुई दिखाई दे रही हैं।
विडंबना यह है कि जिन मनोरम पहाड़ियों और घास के मैदानों का आनंद लेने वह यहां पहुंची थीं, आज उन्हीं इलाकों में देश की कई बड़ी एजेंसियां उनकी तलाश में दिन-रात जुटी हुई हैं।
रहस्य बना हुआ है बरकरार
दयारा बुग्याल उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध अल्पाइन घास के मैदानों में से एक माना जाता है और हर साल हजारों पर्यटक यहां ट्रेकिंग के लिए पहुंचते हैं। ऐसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल से किसी व्यक्ति का अचानक लापता हो जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।
बबीता पांडे के परिवार और परिजन लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि खोज अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कोई स्पष्ट जानकारी या सुराग सामने नहीं आ जाता।
फिलहाल पूरा मामला रहस्य बना हुआ है और उत्तरकाशी की पहाड़ियों में चल रहा यह सर्च ऑपरेशन राज्य के हालिया वर्षों के सबसे बड़े खोज अभियानों में से एक माना जा रहा है।

