29 Oct 2026, Thu

यूपी में नाव और पानी के लिए जहाज के लिए बनेंगे नियम, अंतर्देशीय जलयान नियमावली को मंत्रिमंडल से मिली मंजूरी

राज्य समाचार | परिवहन एवं जलमार्ग

एक उत्तरी भारतीय राज्य में जलमार्ग परिवहन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए नई नियमावली को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई है। इस नियमावली के लागू होने से नावों, स्टीमर और बड़े जहाजों के संचालन के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाएगी। इसके साथ ही पारंपरिक नावों का पंजीकरण भी किया जाएगा। यात्रियों और नाविकों के बीमा का प्रावधान भी इसमें शामिल किया गया है।

अब तक राज्य में बड़े जहाजों का विवरण उपलब्ध था, लेकिन पारंपरिक और बिना इंजन से चलने वाली नावों का व्यवस्थित रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। नई व्यवस्था के तहत ऐसी नावों का पंजीकरण कर उनका डाटा तैयार किया जाएगा। इससे जल परिवहन से जुड़े संसाधनों और नाविकों की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

जलयानों को दो श्रेणियों में बांटा जाएगा

नई नियमावली के तहत जलयानों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में रखा जाएगा। पहली श्रेणी यांत्रिक जलयानों की होगी, जिसमें डीजल से चलने वाले स्टीमर और बड़े जहाज शामिल होंगे। दूसरी श्रेणी गैर-यांत्रिक जलयानों की होगी, जिसमें पारंपरिक नावें और अन्य बिना इंजन से चलने वाले जलयान शामिल किए जाएंगे।

इस वर्गीकरण के आधार पर अलग-अलग प्रकार के जलयानों के पंजीकरण और शुल्क की व्यवस्था निर्धारित की गई है। इससे जल परिवहन के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।

पारंपरिक नावों का भी होगा पंजीकरण

नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य गैर-यांत्रिक नावों का रिकॉर्ड तैयार करना है। अब तक इन नावों की कोई व्यापक सूची उपलब्ध नहीं थी। इसके कारण नावों की कुल संख्या और उनसे जुड़े लोगों की जानकारी जुटाना मुश्किल होता था।

नियमावली के तहत पारंपरिक नावों का पंजीकरण अनिवार्य व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। इसके लिए निर्धारित शुल्क लिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, पंजीकरण से नावों की संख्या और उनके संचालन से संबंधित जानकारी एकत्र की जा सकेगी।

पारंपरिक नावों के लिए 50 रुपये शुल्क

प्रस्तावित व्यवस्था में पारंपरिक गैर-यांत्रिक नावों के पंजीकरण के लिए केवल 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य कम शुल्क के माध्यम से अधिक से अधिक नावों को पंजीकरण व्यवस्था में शामिल करना और उनका रिकॉर्ड तैयार करना है।

वहीं, यांत्रिक जलयानों के लिए उनकी क्षमता और आकार के अनुसार अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं। इनमें यात्रियों की संख्या और भार उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर पंजीकरण शुल्क तय किया गया है।

बताई गई श्रेणियों में 10 से अधिक यात्रियों या पांच टन से अधिक भार वाले जलयान, पांच से दस यात्रियों की क्षमता वाले जलयान और कम भार क्षमता वाले जलयान शामिल हैं। इनके लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए जाने की व्यवस्था है।

यात्रियों और नाविकों के बीमा पर भी जोर

नई नियमावली में यात्रियों और नाविकों के बीमा का प्रावधान भी किया गया है। इसका उद्देश्य जलमार्ग से यात्रा करने वाले लोगों और नाव संचालन से जुड़े व्यक्तियों की सुरक्षा को बेहतर बनाना है।

इसके अलावा, विभिन्न जिलों में नाविकों की संख्या का विवरण जुटाने में भी कठिनाइयां सामने आई हैं। एक प्रमुख धार्मिक शहर में नाविकों की संख्या संबंधी जानकारी उपलब्ध हुई, लेकिन अन्य जिलों में यह आंकड़ा प्राप्त नहीं हो सका। पंजीकरण व्यवस्था से भविष्य में ऐसे आंकड़े जुटाने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, नई नियमावली का उद्देश्य जल परिवहन के लिए स्पष्ट नियम बनाना, नावों का रिकॉर्ड तैयार करना और यात्रियों तथा नाविकों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को मजबूत करना है।

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