मध्यप्रदेश सरकार राज्य को औद्योगिक, आर्थिक और पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के विजन के तहत विकसित किया जा रहा उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (UIMR) प्रदेश की विकास यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य केवल बड़े शहरों का विस्तार नहीं, बल्कि आसपास के कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
UIMR का दायरा बढ़ाकर 16,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक कर दिया गया है। इसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर जिलों की 38 तहसीलें और 2,781 गांव शामिल हैं। इस पूरे क्षेत्र में लगभग 1.25 करोड़ लोग निवास करते हैं। सरकार का मानना है कि यह मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करेगा।
इस परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण औद्योगिक विकास है। UIMR के पास 13,500 हेक्टेयर से अधिक का विशाल भूमि बैंक उपलब्ध है और 14 नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जाने की योजना है। सरकार का अनुमान है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से आने वाले वर्षों में करीब 5 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पीथमपुर को इलेक्ट्रिक व्हीकल और एडवांस इंजीनियरिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी को प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाया जाएगा। वहीं, रतलाम को लॉजिस्टिक्स और निर्यात हब के रूप में नई पहचान मिलेगी।
परियोजना की सफलता का आधार मजबूत कनेक्टिविटी को माना जा रहा है। इसी दिशा में इंदौर और उज्जैन के बीच ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा इंदौर-भोपाल एक्सप्रेसवे और मेट्रो विस्तार जैसी परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं। सरकार का लक्ष्य पूरे क्षेत्र में ‘60 मिनट कनेक्टिविटी’ सुनिश्चित करना है, ताकि लोग और उद्योग एक घंटे के भीतर प्रमुख आर्थिक केंद्रों तक पहुंच सकें।
इस विकास मॉडल की एक खास बात किसानों की भागीदारी है। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत देश का पहला ऐसा लैंड पूलिंग मॉडल लागू किया जा रहा है, जिसमें किसानों को उनकी 60 प्रतिशत विकसित जमीन वापस दी जाएगी। इससे किसान केवल भूमि प्रदाता नहीं, बल्कि विकास प्रक्रिया के सीधे भागीदार बनेंगे।
सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को भी परियोजना का अहम हिस्सा बनाया है। ‘ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट’ नीति के तहत नर्मदा नदी और अन्य जल स्रोतों के आसपास निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण रहेगा। औद्योगिक क्षेत्रों में ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ प्रणाली लागू की जाएगी, ताकि जल प्रदूषण रोका जा सके। साथ ही सौर और पवन ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देकर भविष्य के औद्योगिक क्लस्टरों को कार्बन न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
पर्यटन के क्षेत्र में भी इस परियोजना से बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू और महेश्वर को जोड़कर एक लक्जरी टूरिज्म सर्किट विकसित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक पर्यटन क्षेत्र का राज्य की जीडीपी में योगदान 10 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इस पहल से स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि UIMR परियोजना मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

