देश में घरेलू उद्योगों को सस्ते विदेशी आयात से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने कई आयातित उत्पादों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने और कुछ मामलों में इसे बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब घरेलू उद्योग लंबे समय से विदेशी कंपनियों द्वारा कम कीमत पर उत्पादों की आपूर्ति किए जाने को लेकर चिंता जता रहे थे।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, रबर और टायर उद्योग में उपयोग होने वाले एक महत्वपूर्ण रसायन के आयात पर अगले पांच वर्षों के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू की गई है। यह निर्णय संबंधित जांच एजेंसी की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। जांच में पाया गया कि कुछ देशों से इस रसायन का निर्यात सामान्य बाजार मूल्य से कम कीमत पर किया जा रहा था, जिससे देश के घरेलू उत्पादकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।
अधिसूचना के तहत इस रसायन के आयात पर अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार प्रति टन 75 अमेरिकी डॉलर से लेकर 1,748 अमेरिकी डॉलर तक की एंटी-डंपिंग ड्यूटी निर्धारित की गई है। यह शुल्क पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि इसे संशोधित, प्रतिस्थापित या समाप्त नहीं किया जाता।
इसके अलावा, सरकार ने एल्युमिनियम फॉयल के आयात पर भी सख्ती दिखाई है। चीन, मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया से आने वाले एल्युमिनियम फॉयल पर लगाई जाने वाली एंटी-डंपिंग ड्यूटी में बढ़ोतरी की गई है। सरकार का मानना है कि इन देशों से कम कीमत पर बड़े पैमाने पर हो रहे आयात से घरेलू एल्युमिनियम उद्योग प्रभावित हो रहा था। नई व्यवस्था के तहत यह शुल्क निर्धारित अवधि तक लागू रहेगा।
एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में, चीन से आयात होने वाले पॉलिएथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) रेजिन पर भी अगले पांच वर्षों के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की घोषणा की गई है। इस उत्पाद का उपयोग पैकेजिंग और प्लास्टिक उद्योग में व्यापक स्तर पर किया जाता है। सरकार को आशंका थी कि कम कीमत पर हो रहे आयात के कारण देश के उत्पादकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एंटी-डंपिंग ड्यूटी का उद्देश्य आयात पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं होता, बल्कि निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को सुनिश्चित करना होता है। जब कोई विदेशी कंपनी किसी उत्पाद को अपने घरेलू बाजार की तुलना में कम कीमत पर दूसरे देश में बेचती है और इससे स्थानीय उद्योगों को नुकसान होता है, तो ऐसी स्थिति को डंपिंग कहा जाता है।
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत सदस्य देशों को यह अधिकार प्राप्त है कि वे घरेलू उद्योगों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए एंटी-डंपिंग उपाय लागू कर सकें। इसके लिए विस्तृत जांच की जाती है, जिसमें यह आकलन किया जाता है कि आयातित उत्पाद वास्तव में घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचा रहे हैं या नहीं।
उद्योग जगत का मानना है कि सरकार के इन कदमों से देश के विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और स्थानीय कंपनियों को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर प्राप्त होगा। इससे निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजगार सृजन में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आयात शुल्क बढ़ने से कुछ उद्योगों की लागत प्रभावित हो सकती है, जो इन कच्चे माल पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकार को घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।

