1 Oct 2026, Thu

बिजली बिल से होगी ट्रैफिक चालान की वसूली? सुप्रीम कोर्ट ने लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन, पॉल्यूशन रीन्यूअल रोकने के दिए निर्देश

देशभर में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने के बाद जुर्माना नहीं भरने वाले वाहन मालिकों के लिए अब मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ट्रैफिक ई-चालान का बड़ा बकाया सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसकी वसूली को लेकर कई अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि जिन वाहनों पर ट्रैफिक जुर्माना लंबित है, उनसे जुड़ी कई ऑनलाइन और परिवहन सेवाओं को रोका जा सकता है।

बताया गया है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ट्रैफिक ई-चालान की करीब 20 हजार करोड़ रुपये की राशि बकाया है। इसी बकाया राशि की वसूली को प्रभावी बनाने के लिए कोर्ट ने पहले ट्रैफिक चालान को बिजली के बिल से जोड़कर वसूली करने का सुझाव दिया था। इसके बाद गुरुवार को वाहन और ड्राइविंग से जुड़ी सेवाओं पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए।

चालान नहीं भरने पर रुक सकती हैं कई सेवाएं

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, जिन वाहनों से संबंधित ट्रैफिक जुर्माना लंबे समय से लंबित है, उनके रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण रोका जा सकता है। इसके अलावा वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC जारी करने पर भी रोक लगाई जा सकती है।

वाहन के मालिकाना हक का ट्रांसफर और ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण जैसी सेवाएं भी बकाया चालान का भुगतान होने तक रोकी जा सकती हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ट्रैफिक नियम तोड़ने के बाद लगाए गए जुर्माने की वसूली प्रभावी तरीके से हो सके।

केंद्रीय पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट हो सकती हैं गाड़ियां

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने बकाया ई-चालान वाले वाहनों को केंद्रीय परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने का निर्देश भी दिया है। ऐसी स्थिति में संबंधित वाहन की बिक्री या उसके मालिकाना हक के ट्रांसफर पर भी रोक लग सकती है।

इसके अलावा जब तक लंबित ट्रैफिक जुर्माना जमा नहीं किया जाता, तब तक संबंधित वाहन के लिए PUC प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति नहीं देने की बात कही गई है। अगर किसी वाहन पर लगातार कई ट्रैफिक उल्लंघन पाए जाते हैं, तो उसके मालिक के ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण को रोकने और मौजूदा लाइसेंस को निलंबित करने की दिशा में भी कार्रवाई की जा सकती है।

सिर्फ ई-चालान जारी करने से नहीं होगी समस्या हल

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल बड़ी संख्या में ई-चालान जारी कर देने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। जब तक इन चालानों से जुड़ी जुर्माने की राशि वसूल नहीं होती, तब तक सड़क सुरक्षा नियमों को प्रभावी बनाने की कोशिश अधूरी रहेगी।

कोर्ट को उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय में जारी किए गए ई-चालानों पर करीब 49,194.05 करोड़ रुपये की राशि बकाया थी। इसमें से अब तक लगभग 26,175.05 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है।

इन निर्देशों का उद्देश्य लंबित ट्रैफिक जुर्माने की वसूली को मजबूत करना और वाहन मालिकों को ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए अधिक जिम्मेदार बनाना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *