दिल्ली में त्योहारों का मौसम शुरू होने के साथ ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। नवरात्रि, रामलीला और दीपावली के दौरान दुकानदारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद रहती है। ऐसे में व्यापारी नहीं चाहते कि धरने-प्रदर्शनों या रास्तों में बाधा के कारण उनका कारोबार प्रभावित हो। व्यापारिक संगठनों ने बाजारों की सुरक्षा मजबूत करने और दुकानों के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मांग उठाई है।
व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ जाती है। लोग कपड़े, आभूषण, सजावटी सामान, मिठाइयां और घरेलू जरूरतों की चीजें खरीदने के लिए बाजारों का रुख करते हैं। इस अवधि में कारोबारियों को पूरे साल की कमाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हासिल होने की उम्मीद रहती है। ऐसे में बाजार बंद होने या यातायात बाधित होने से दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग
व्यापारिक संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर बाजारों और दुकानदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पुलिस को त्योहारों के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि व्यापारी बिना किसी डर के अपनी दुकानें खोल सकें और ग्राहक भी आसानी से खरीदारी कर सकें।
व्यापारियों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान सड़कों पर जाम, रास्तों की घेराबंदी और आवाजाही में रुकावट से बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसका सीधा असर दुकानों की बिक्री पर पड़ता है। इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ व्यापारिक गतिविधियों को सामान्य बनाए रखना भी जरूरी है।
प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित होने का दावा
व्यापारिक संगठन ने दावा किया है कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के चलते दिल्ली के कारोबार पर असर पड़ा था। संगठन के अनुसार, उस दिन करीब 2,000 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ और 20 लाख से अधिक व्यापारियों पर इसका असर पड़ा। हालांकि, ये आंकड़े संगठन की ओर से किए गए दावे हैं।
संगठन का कहना है कि त्योहारों के दौरान कारोबार में रुकावट से केवल दुकानदार ही नहीं, बल्कि उनके यहां काम करने वाले कर्मचारियों, छोटे कारोबारियों और सामान की आपूर्ति करने वालों को भी नुकसान हो सकता है।
दीपावली तक प्रदर्शन टालने की अपील
व्यापारियों ने राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों से अपील की है कि दीपावली तक दिल्ली में धरने-प्रदर्शन आयोजित करने से बचा जाए। उनका सुझाव है कि यदि प्रदर्शन करना आवश्यक हो, तो ऐसा स्थान चुना जाए जहां बाजारों, प्रमुख सड़कों और व्यापारिक गतिविधियों पर कम से कम असर पड़े।
व्यापारिक संगठनों का मानना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना लोगों का अधिकार है, लेकिन त्योहारों के दौरान आम जनता और कारोबारियों की परेशानियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
रामलीलाओं और रोजगार पर भी पड़ सकता है असर
दिल्ली में करीब 650 रामलीलाओं के आयोजन का उल्लेख करते हुए संगठन ने कहा कि इन कार्यक्रमों से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। यदि सड़कों या मेट्रो स्टेशनों के आसपास आवाजाही प्रभावित होती है, तो दर्शकों की संख्या घट सकती है और इससे आयोजन से जुड़े कारोबार पर असर पड़ सकता है।
व्यापारियों को उम्मीद है कि पुलिस प्रशासन समय रहते सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम करेगा। इससे बाजारों में खरीदारी का माहौल बना रहेगा और त्योहारों के दौरान कारोबार सामान्य रूप से चलता रहेगा।

