भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए रिटेल पेट्रोल पंपों से थोक खरीद पर सख्ती लागू कर दी है। नए आदेश के तहत अब औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ता पेट्रोल पंप से बड़ी मात्रा में डीजल या पेट्रोल नहीं खरीद सकेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे उपभोक्ताओं को अब केवल निर्धारित थोक बिक्री केंद्रों (consumer/wholesale outlets) से ही ईंधन लेना होगा।
नई व्यवस्था के अनुसार, पेट्रोल पंप से एक बार में अधिकतम 200 लीटर तक डीजल ही खरीदा जा सकता है और वह भी केवल वाहन के फ्यूल टैंक या अधिकृत कंटेनर में। इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि पेट्रोल पंप से खरीदा गया ईंधन दोबारा बेचा नहीं जा सकता।
सरकार का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में रिटेल और थोक कीमतों में अंतर के कारण डीजल की मांग में असामान्य वृद्धि देखी गई थी, जिससे सप्लाई सिस्टम पर दबाव बढ़ा। इसी को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। आदेश में कहा गया है कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन, शिपिंग लॉजिस्टिक्स और पेट्रोलियम उपलब्धता पर असर पड़ा है, इसलिए यह फैसला जरूरी हो गया।
दिल्ली में फिलहाल पेट्रोल पंप पर डीजल की कीमत लगभग 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि थोक बाजार में इसकी कीमत करीब 134.50 रुपये प्रति लीटर बताई जा रही है। इसी मूल्य अंतर के कारण कई बड़े उपभोक्ता पेट्रोल पंप से ही थोक मात्रा में डीजल खरीद रहे थे, जिससे रिटेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
सरकारी आदेश के मुताबिक, अब इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल यूजर्स को रिटेल पेट्रोल पंप से ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें केवल अधिकृत थोक सप्लाई पॉइंट्स से ही ईंधन प्राप्त करना होगा। यह नियम पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस मंत्रालय द्वारा जारी “मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल ऑर्डर, 2026” के तहत लागू किया गया है।
सरकार ने यह भी बताया कि हाल के समय में टेलीकॉम टावर, जनरेटर सेट और अन्य औद्योगिक उपयोगों में डीजल की खपत बढ़ी है, जिसके कारण कई संस्थागत उपभोक्ता रिटेल पंपों की ओर रुख कर रहे थे। इससे आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की उपलब्धता प्रभावित होने की स्थिति बन रही थी।
नए नियमों के अनुसार, तेल की बिक्री पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। किसी भी प्रकार की जमाखोरी, ब्लैक मार्केटिंग या अवैध बिक्री पर राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत सजा का प्रावधान भी लागू होगा।
यह आदेश फिलहाल 90 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे जरूरत पड़ने पर आगे बढ़ाया भी जा सकता है। सरकार का उद्देश्य देशभर में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को संतुलित रखना और आम उपभोक्ताओं को निर्बाध ईंधन उपलब्ध कराना है।
अधिकारियों के अनुसार, रिटेल और थोक बिक्री में बढ़ते अंतर का फायदा उठाकर कुछ उपभोक्ता बड़ी मात्रा में ईंधन खरीद रहे थे, जिससे सप्लाई चेन में असंतुलन पैदा हो रहा था। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
सरकार ने सभी तेल कंपनियों और फ्यूल रिटेलर्स को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को रोका जा सके और देश में ईंधन की स्थिर आपूर्ति बनी रहे।

