रूस और जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय विवाद ने एक बार फिर दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इटुरुप (Etorofu) द्वीप के दौरे पर जापान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘बिल्कुल अस्वीकार्य’ करार दिया है। जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने कहा कि पुतिन का यह दौरा न केवल जापान की संप्रभुता से जुड़े उसके रुख के खिलाफ है, बल्कि इससे दोनों देशों के संबंधों को भी गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, पुतिन ने गुरुवार को इटुरुप द्वीप का दौरा किया और वहां स्थित यास्नी फिश प्रोसेसिंग प्लांट का निरीक्षण किया। यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार है जब पुतिन उन चार विवादित द्वीपों में से किसी एक पर पहुंचे हैं, जिन पर रूस का नियंत्रण है लेकिन जापान उन्हें अपना क्षेत्र मानता है।
क्या है इटुरुप द्वीप विवाद?
इटुरुप दक्षिणी कुरिल द्वीप समूह का हिस्सा है। द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में सोवियत संघ ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था। तब से जापान इन द्वीपों पर अपना दावा करता रहा है और इन्हें अपना ‘उत्तरी क्षेत्र’ (Northern Territories) मानता है।
रूस इन द्वीपों को अपने सखालिन क्षेत्र का हिस्सा मानता है और वहां सैन्य तथा आर्थिक गतिविधियों का विस्तार भी कर चुका है। इसी विवाद के कारण दोनों देशों के बीच अब तक औपचारिक शांति संधि नहीं हो सकी है, जबकि द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुए आठ दशक से अधिक समय बीत चुका है।
जापान ने जताई कड़ी आपत्ति
प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने कहा कि जापान ने रूस से कई बार अनुरोध किया था कि राष्ट्रपति स्तर पर विवादित द्वीपों का दौरा न किया जाए। उनके अनुसार, पुतिन ने जनवरी 2024 में इस क्षेत्र की यात्रा करने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद से तोक्यो लगातार मॉस्को से इस कदम से बचने की अपील करता रहा।
उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “इटुरुप जापान का ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मूल क्षेत्र है। ऐसे में रूस के राष्ट्रपति का वहां जाना जापान के लंबे समय से चले आ रहे रुख के पूरी तरह खिलाफ है।”
ताकाइची ने यह भी कहा कि इस यात्रा से जापानी जनता में रूस के प्रति नाराजगी और बढ़ेगी और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की संभावनाओं को झटका लगेगा।
रूस का रुख
रूस ने जापान की आपत्ति को स्वीकार नहीं किया है। मॉस्को का कहना है कि इटुरुप और अन्य दक्षिणी कुरिल द्वीप रूस का अभिन्न हिस्सा हैं और रूसी राष्ट्रपति का वहां जाना देश के आंतरिक मामलों का हिस्सा है।
हाल के वर्षों में रूस ने इन द्वीपों पर बुनियादी ढांचे, मत्स्य उद्योग और सैन्य सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। पुतिन का यह दौरा भी इसी रणनीतिक महत्व के संदर्भ में देखा जा रहा है।
शांति समझौते की उम्मीदें फिर कमजोर
विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब रूस और जापान के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद जापान ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके जवाब में रूस ने भी कड़े कदम उठाए हैं।
दक्षिणी कुरिल द्वीपों को लेकर बढ़ा यह नया विवाद दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित शांति समझौते की संभावनाओं को और कमजोर कर सकता है। यदि इस मुद्दे पर कोई नई कूटनीतिक पहल नहीं होती, तो रूस-जापान संबंधों में तनाव आने वाले समय में और बढ़ सकता है।

