12 Jun 2026, Fri

‘पापा मैं फ्लाइट में बैठ गया’- आखिरी मैसेज आज भी सुनाई देता है; अहमदाबाद प्लेन क्रैश की पहली बरसी, आंसू नहीं रोक पा रहे परिवार

 

12 जून 2025 को हुए अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे को आज एक वर्ष पूरा हो गया है, लेकिन इस त्रासदी में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के लिए समय जैसे थम सा गया है। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171, जो अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुई थी, उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद एक मेडिकल कॉलेज परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस भीषण हादसे में कुल 260 लोगों की जान चली गई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

एक साल बाद भी पीड़ित परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ है। कई लोग आज भी उस भयावह दिन की यादों से बाहर नहीं निकल पाए हैं। हादसे के बाद मानसिक आघात झेल रहे कई परिवार काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता का सहारा ले रहे हैं, जबकि कुछ लोगों में हवाई यात्रा को लेकर गहरा डर बैठ गया है।

ऐसे ही एक परिवार हैं दीव के रहने वाले रफीक अरब, जिन्होंने इस दुर्घटना में अपने 25 वर्षीय बेटे फैजान को खो दिया था। फैजान ब्रिटेन में इस्लामिक स्टडीज़ की पढ़ाई कर रहा था और परिवार से मिलने के बाद वापस लंदन लौट रहा था। रफीक बताते हैं कि हादसे से पहले उनके बेटे का आखिरी संदेश आया था, जिसमें उसने लिखा था, “पापा, मैं फ्लाइट में बैठ गया हूं और अब जा रहा हूं।” यह संदेश आज भी उनके मोबाइल फोन में सुरक्षित है और हर बार उसे पढ़ते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं।

रफीक अरब का कहना है कि बेटे को खोने के बाद उन्होंने आज तक किसी विमान में यात्रा नहीं की है। हवाई जहाज का नाम सुनते ही उन्हें उस दिन की भयावह यादें सताने लगती हैं। उनका कहना है कि एक साल बीत जाने के बावजूद ऐसा लगता है जैसे यह हादसा कल ही हुआ हो।

इस हादसे ने केवल यात्रियों के परिवारों को ही नहीं, बल्कि प्रत्यक्षदर्शियों और बचाव कार्य में शामिल लोगों को भी गहरे मानसिक आघात दिए हैं। कई लोगों ने बताया कि दुर्घटना के दृश्य आज भी उनके मन में ताजा हैं और वे उन्हें भूल नहीं पाए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े हादसों के बाद मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाला असर कई वर्षों तक बना रह सकता है। इसलिए प्रभावित परिवारों और लोगों को लगातार भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहायता की जरूरत होती है। कई सामाजिक संस्थाएं और सहायता समूह आज भी पीड़ित परिवारों के साथ जुड़े हुए हैं और उन्हें सामान्य जीवन में लौटने में मदद कर रहे हैं।

हादसे की पहली बरसी पर अहमदाबाद में कई स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया। परिवारों ने अपने प्रियजनों को याद करते हुए मोमबत्तियां जलाईं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने मांग की कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विमान सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत किया जाए।

एक साल बाद भी यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के जीवन में हमेशा के लिए दर्ज हो चुका एक ऐसा दर्द है, जिसे शायद समय भी पूरी तरह भर नहीं पाएगा।

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