14 Apr 2026, Tue

दुनिया में ईंधन और उर्वरक की कीमतें लंबे समय तक रह सकती हैं ऊंची, आईएमएफ-वर्ल्ड बैंक ने बताई वजह

मध्य पूर्व में जारी तनाव और युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ तौर पर दिखने लगा है। International Monetary Fund, World Bank और International Energy Agency ने संयुक्त रूप से चेतावनी दी है कि कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की कीमतें आने वाले समय में लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। इन संस्थानों के अनुसार, मौजूदा हालात बेहद अनिश्चित हैं और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति अभी सामान्य नहीं हो पाई है।

तीनों वैश्विक संस्थाओं ने हाल ही में एक समन्वय बैठक के बाद यह बयान जारी किया। इस समूह का गठन मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करने के लिए किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संकट का असर पूरी दुनिया पर असमान रूप से पड़ रहा है, खासकर उन देशों पर जो ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर हैं और जिनकी आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर शिपिंग अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, और यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है। हालांकि भविष्य में शिपिंग बहाल होने की उम्मीद जताई गई है, लेकिन आपूर्ति को पहले के स्तर पर पहुंचने में काफी समय लग सकता है।

इस बीच, कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है, जिससे उर्वरकों की लागत भी बढ़ गई है। इसका सीधा असर कृषि और खाद्य उत्पादन पर पड़ रहा है। नतीजतन, वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कई देशों में महंगाई दर में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस संघर्ष के कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं। पर्यटन और यात्रा उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसे सामान्य स्थिति में लौटने में लंबा समय लग सकता है। वहीं, तेल और गैस निर्यात करने वाले कुछ देशों को भी नुकसान उठाना पड़ा है, क्योंकि आपूर्ति बाधित होने से उनके राजस्व पर असर पड़ा है।

International Energy Agency की हालिया रिपोर्ट और International Monetary Fund के आर्थिक आकलन से पहले जारी इस संयुक्त बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण ऊर्जा क्षेत्र की रिकवरी धीमी रह सकती है। इससे ईंधन और उर्वरक की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं।

अंत में, तीनों संस्थानों ने कहा कि वे स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर प्रभावित देशों को नीति सलाह और वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उनका लक्ष्य वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर, मजबूत और समावेशी दिशा में आगे बढ़ाना है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह राह आसान नहीं दिखाई देती।

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