ना वृद्धि दर्ज की गई। इस ग्रोथ में टाटा मोटर्स और मारुति सुजुकी की अहम भूमिका रही, जिनकी बिक्री में क्रमशः 31% और 32% की बढ़ोतरी हुई। वहीं महिंद्रा एंड महिंद्रा और हुंडई ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, हालांकि इनकी वृद्धि अपेक्षाकृत मध्यम रही।
इसके अलावा टोयोटा किर्लोस्कर ने भी 21% की वृद्धि दर्ज कर मजबूत उपस्थिति दिखाई।
कमर्शियल व्हीकल और टू-व्हीलर में भी उछाल
कमर्शियल वाहनों की बिक्री में भी करीब 16% की बढ़ोतरी देखी गई। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी मांग और माल ढुलाई की स्थिर गतिविधियों का बड़ा योगदान रहा। खासतौर पर छोटे कमर्शियल वाहनों की मांग में तेज वृद्धि दर्ज की गई।
दोपहिया वाहन सेगमेंट में तो और भी ज्यादा तेजी देखने को मिली। इस श्रेणी में करीब 30% की वृद्धि हुई, जिसमें हीरो मोटोकॉर्प और रॉयल एनफील्ड की मजबूत बिक्री का बड़ा योगदान रहा। वहीं टीवीएस मोटर कंपनी ने भी अच्छी बढ़त हासिल की, खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में।
ईवी, ट्रैक्टर और तीन-पहिया वाहनों की मांग बढ़ी
इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में 74% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। इसमें टाटा मोटर्स और महिंद्रा का दबदबा बना हुआ है।
ट्रैक्टर और तीन-पहिया वाहनों की बिक्री में भी जबरदस्त उछाल आया है। खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां, जल संसाधनों की बेहतर स्थिति और सरकारी योजनाओं ने इस सेगमेंट को मजबूती दी है।
भू-राजनीतिक तनाव बना बड़ा खतरा
हालांकि इस तेज रफ्तार के बीच रिपोर्ट में एक अहम चेतावनी भी दी गई है। बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव ऑटो सेक्टर के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है। खासतौर पर सप्लाई चेन में बाधा, कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और माल ढुलाई की लागत बढ़ना आने वाले समय में चुनौती बन सकते हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर फिलहाल मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है और अगले कुछ महीनों तक इसकी ग्रोथ जारी रहने की संभावना है। लेकिन वैश्विक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए उद्योग को सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि यह तेजी लंबे समय तक बरकरार रह सके।

